पंचकूला, जेएनएन। हरियाणा के पूर्व मुख्‍यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और पूर्व केंद्रीय मंत्री मोतीलाल वोरा को पंचकूला के AJL प्‍लॉट आवंटन केस में बड़ी राहत मिली है। यहां विशेष ईडी कोर्ट (Special ED Court) ने हुड्डा और वोरा की अग्रिम जमानत की अर्जी मंजूर कर ली है। प्‍लॉट आवंटन मामले पर आज सुबह अदालत में सुनवाई हुई। हुड्डा और वाेरा के साथ ही मामले में अन्‍य आरोपित भी अदालत में पेश हुए। अब इस मामले पर 10 दिसंबर को सुनवाई होगी।

पंचकूला स्थित हरियाणा की विशेष ईडी कोर्ट में AJL प्लॉट आवंटन मामले में आज  सुनवाई हुई। आज की सुनवाई के दौरान मामले के दोनों मुख्य आरोपित पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा व AJL हाउस के तत्‍तकालीन चेयरमैन मोतीलाल वोरा कोर्ट में पेश हुए। हुड्डा और वोरा के वकीलों ने उनकी जमानत की अर्जी कोर्ट में दी थी। इस पर पिछली सुनवाई में कोर्ट ने हुड्डा व मोतीलाल वोरा को अंतरिम जमानत दी थी। दोनों को पांच-पांच लाख रुपये बांड पर अंतरिम जमानत दी थी।

बचाव पक्ष द्वारा नियमित जमानत के लिए अर्जी दी गई थी। इस आवेदन पर अदालत में सुनवाई हुई। आज की सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बचाव पक्ष की इस याचिका पर अपना जवाब दायर किया। इसके बाद विशेष ईडी कोर्ट ने याचिका पर अपना फैसला सुनाया और इसे मंजूर कर लिया।

बता दें कि 26 अगस्त को इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हुड्डा एवं वोरा के खिलाफ अभियोजन की शिकायत दाखिल कर दी थी। हुड्डा पर आरोप है कि उन्होंने 64.93 करोड़ रुपये का प्लॉट AJL को 69 लाख 39 हजार रुपये में दिया था। कुछ दिन पूर्व प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पंचकूला में एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) को एक भूखंड आवंटन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से पूछताछ की थी। हुड्डा के धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत बयान दर्ज किए गए थे।

बता दें कि पंचकूला के सेक्टर 6 मे भूखंड सी-17 नंबर AJL को आवंटित किया गया था। इसे पिछले साल ED ने कुर्क कर लिया था। AJL को कथित तौर पर नेहरू-गांधी परिवार के सदस्यों सहित कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं द्वारा संचालित किया जाता था। यह ग्रुप नेशनल हेरल्ड अखबार निकालता था।

ED की जांच में पाया गया है कि हुड्डा ने हरियाणा का मुख्यमंत्री रहने के दौरान अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग करते हुए यह भूखंड पुन: आवंटन की आड़ में नए सिरे से AJL को 1982 की दर (91 रुपये प्रति वर्ग मीटर) और ब्याज के साथ गलत तरीके से आवंटित कर दिया। एजेंसी ने कहा था कि 2005 में इस पुन: आवंटन से AJL को अनुचित फायदा हुआ। ED के मुताबिक, इस भूखंड का बाजार मूल्य 64.93 करोड़ रुपये था, जबकि इसे हुड्डा को 69.39 लाख रुपये में आवंटित कर दिया। बता दें कि हुड्डा के खिलाफ विशेष CBI अदालत में मानेसर जमीन घोटाले में भी सुनवाई चल रही है।

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