गुवाहाटी, आइएएनएस। प्रख्यात असमी गायक दिवंगत भूपेन हजारिका के पुत्र तेज हजारिका ने सोमवार को 'कष्टदायी अलोकप्रिय' नागरिकता विधेयक पारित कराने की राजग सरकार की कोशिश पर नाखुशी जाहिर की, लेकिन साथ ही उन्होंने साफ किया कि वह उनके दिवंगत पिता को दिए जा रहे देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न को लेने से इन्कार नहीं करेंगे।

अमेरिका में रह रहे तेज हजारिका ने यह स्पष्टीकरण ऐसे समय जारी किया है जब कुछ स्थानीय असमी चैनलों ने यह समाचार प्रसारित किया कि उन्होंने अपने पिता को दिए जा रहे 'भारत रत्न' सम्मान को स्वीकार करने से इन्कार कर दिया है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि 'भारत रत्न' सम्मान प्रदान करने के लिए उन्हें अभी तक कोई आमंत्रण प्राप्त नहीं हुआ है।

दो भाजपा मुख्यमंत्रियों ने भी किया नागरिकता विधेयक का विरोध
नई दिल्ली। भाजपा शासित पूर्वोत्तर के दो राज्यों अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर के मुख्यमंत्रियों ने नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध किया है। सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के साथ 30 मिनट तक चली मुलाकात में अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू और मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने अनुरोध किया कि यह विधेयक राज्यसभा से पारित न हो। राजनाथ सिंह ने दोनों मुख्यमंत्रियों को आश्वस्त किया कि पूर्वोत्तर के स्वदेशी लोगों के अधिकार किसी भी सूरत में प्रभावित नहीं होंगे।

क्या है नागरिकता संशोधन विधेयक
नागरिकता संशोधन विधेयक, 2016 के तहत नागरिकता कानून,1955 में संशोधन कर पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए गैर मुस्लिम धार्मिक अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है। इस कानून में इन देशों से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई जो बिना वैध यात्रा दस्तावेजों के भारत आए हैं, या जिनके वैध दस्तावेजों की समय सीमा खत्म हो गई है, उन्हें भारतीय नागरिकता हासिल हो सकेगी।

भारत रत्‍न पुरस्‍कार की घोषणा के समय  हजारिका के बारे में पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा था कि भूपेन हजारिका के गीत और संगीत की हर पीढ़ी के लोगों ने प्रशंसा की है। इसके जरिए उन्होंने न्याय, सौहार्द्र और भाईचारे का संदेश दिया। उन्होंने भारत की संगीत परंपरा को विश्व स्तर पर लोकप्रिय बनाया। भूपेन दा को भारत रत्न दिए जाने पर प्रसन्नता हुई।

भूपेन हजारिका को पूर्वोत्तर और खासकर गृह प्रदेश असम में प्रचंड समर्थन है। लोगों के दिलों में उनके लिए इतनी श्रद्धा है कि असम की राजधानी गुवाहाटी में उनकी याद में मंदिर भी है। 

Posted By: Arun Kumar Singh

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