गोरखपुर, जेएनएन। Ayodhya Verdict राम मंदिर को लेकर गोरक्षपीठाधीश्‍वर महंत अवेद्यनाथ की चिंता ब्रह्मलीन होने तक बनी रही। गोरखनाथ मंदिर के सचिव द्वारिका तिवारी बताते हैं कि राम मंदिर आंदोलन में महंत अवेद्यनाथ की जान बसती थी। मंदिर में आने वाले हर महत्वपूर्ण व्यक्ति से वह अपने जीवन काल में राम मंदिर निर्माण देखने की इच्छा जरूर व्यक्त करते थे।

हर एक से व्‍यक्‍त करते अपनी चिंता

मंदिर सचिव बताते हैं कि जब वह बीमार हो गए और कहीं आने-जाने में दिक्कत होने लगी तो उन्होंने इसे लेकर गोरखनाथ मंदिर से अपना प्रयास जारी रखा। भारतीय जनता पार्टी, हिंदू संगठन, संत-महंत कोई भी मंदिर में आता, उससे चर्चा के दौरान वह राम मंदिर को लेकर अपनी चिंता जरूर व्यक्त करते। कई बार तो हर वाक्य के बाद उनकी जुबां पर राम मंदिर का नाम आ जाता था।

जीते जी बन जाए मंदिर

महंत अवेद्यनाथ के ब्रह्मलीन होने से कुछ समय पहले जब आरएसएस के तत्कालीन मुखिया केसी सुदर्शन उनसे मिलने आए तो वह बार-बार इस बात का जिक्र करते रहे कि जीते जी राम मंदिर बनते देखना चाहते हैं। मंदिर में होने वाले सभी कार्यक्रमों के मंच से भी उन्होंने न केवल खुद इसके लिए आवाज उठाई बल्कि सभी को इसके लिए उत्साहित भी किया। महंत अवेद्यनाथ के ब्रह्मलीन होने के बाद योगी आदित्यनाथ ने इस परंपरा को जारी रखा। महंत दिग्विजय नाथ और महंत अवेद्यनाथ के पुण्यतिथि समारोह के मंच पर तो कई बार राम मंदिर की चर्चा का केंद्र बन जाते थे।

Posted By: Pradeep Srivastava

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