राज्य ब्यूरो, लखनऊ। अखिलेश सरकार खनन ठेकेदारों पर खूब मेहरबान रही है। परिवहन परमिट (एमएम-11) के बगैर ठेकेदार बालू-मौरंग-गिट्टी सहित अन्य खनिजों की सप्लाई करते रहे। जानकारी होने के बावजूद खनन विभाग इन ठेकेदारों से खनिज मूल्य का 191 करोड़ रुपये व जुर्माने की धनराशि 2.95 करोड़ रुपये वसूल नहीं पाया। साथ ही बगैर पर्यावरण मंजूरी व खनन योजना के बिना अवैध खनन चलता रहा।

भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट में यह तथ्य उजागर हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अप्रैल 2014 से फरवरी 2017 के बीच कार्यदायी संस्थाओं ने ठेकेदारों से 1181 निर्माण कार्य कराए। इनमें ठेकेदारों ने बिलों के साथ खनिजों का परिवहन परमिट नहीं लगाया। जिला खान अधिकारियों ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की, जबकि इसमें ठेकेदारों पर खनिज मूल्य 191.20 करोड़ रुपये व जुर्माने के रूप में 2.95 करोड़ रुपये की वसूली की जानी थी।

सीएजी की रिपोर्ट में पर्यावरण मंजूरी के बगैर खनन होने पर भी आपत्ति की गई है। वर्ष 2015-16 में चार मामले ऐसे मिले हैं, जिनमें पर्यावरण मंजूरी के बगैर खनन कार्य हो रहा था। इस मामले में भी खनन विभाग ने खनिज मूल्य व जुर्माने का 33.75 करोड़ रुपये नहीं वसूला। रिपोर्ट में पर्यावरण मंजूरी के बिना ईंट मिट्टी के खनन के मामले में आपत्ति की है। इसमें 2909 ईंट भट्टों द्वारा बिना पर्यावरण मंजूरी के मिट्टी का खनन किया गया। इनसे भी सरकार ने 62.27 करोड़ रुपये नहीं वसूले।

रिपोर्ट में खनन योजना के बगैर खनन कार्य किए जाने पर भी आपत्ति जताई गई है। बांदा में ही पांच मामले ऐसे मिले हैं जहां खनन योजना के बगैर मौरंग का खनन हो रहा था, जबकि नियम यह है कि बगैर योजना के खनन होता मिला तो उसे अवैध खनन माना जाएगा। इस मामले में भी सरकार को 7.71 करोड़ रुपये की चपत लगी है। जांच में कई जगह खनन योजना से अधिक खनन होता मिला है।

Posted By: Umesh Tiwari

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