चंडीगढ़ [जय सिंह छिब्बर]। पूर्व कैबिनेट मंत्री नवजोत सिद्धू के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह के एक और मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा सरकार की कार्यशैली से खफा हो गए हैं। रंधावा ने बेअदबी के मुद्दे पर सार्वजनिक तौर पर यहां तक कह दिया, 'मैं सरकार में रहूं या न रहूं, लेकिन झूठ नहीं बोल सकता। सरकारें आती-जाती रहती हैं। हम भी बादल की तरह सजा के भागीदार बन रहे हैं। यदि यही हाल रहा तो लोग हम पर थूकेंगे भी नहीं।' रंधावा के इस बयान ने सियासी हलकों में हलचल पैदा कर दी है। विरोधियों को भी बड़ा मुद्दा मिल गया है।

इससे पहले पटियाला हलके के चार विधायकों ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर अपनी सरकार के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया था। कैप्टन ने बड़ी मुश्किल से उनके गुस्से को शांत किया था। करीब 25 विधायकों के मोर्चा खोलने की भनक लगने पर कुछ को सरकार ने विधायकों का सलाहकार बना कर लॉलीपॉप दिया था। विधायक सुरजीत धीमान, नत्थू राम, कुलबीर जीरा, पूर्व मंत्री राणा गुरजीत सिंह समेत कई विधायक अफसरशाही से नाराज हैं।

पंथक जत्थों ने दिया था घर के बाहर धरना

कुछ पंथक संगठनों से जुड़े लोगों ने सुखजिंदर सिंह रंधावा के घर के आगे धरना दिया था। लोगों के गुस्से को शांत करने के लिए रंधावा ने प्रदर्शनकारियों के सामने कहा, 'हम लोगों को क्या जवाब दें। लोग हमें पूछते हैं। हमें तो लोगों से मिलना है। इस मामले में इंसाफ मिलना चाहिए था। हम भी बादलों की तरह सजा के भागीदार बन रहे हैं। पहले दिन ही दोषियों को अंदर कर देना चाहिए था। कई पुलिस अधिकारियों को अंदर गए बिना ही जमानतें मिल गईं। मैं झूठ नहीं बोल सकता। भले ही कुर्सी छोडऩी पड़ जाए।' 

रंधावा और बाजवा ने खत्म कराए थे धरने, मोर्चे

बेअदबी मामले के विरोध में पंथक संगठनों ने कई दिनों तक मोर्चे व धरने लगाए थे। इन्हें खत्म करवाने में कैबिनेट मंत्रियों सुखजिंदर सिंह रंधावा और तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा की अहम भूमिका थी। उन्होंने पंथक संगठनों को बेअदबी और नशे के मामलों में दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिया था। कई विधायक कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री से मिल चुके हैं। विधानसभा सदन में तकनीकी शिक्षा मंत्री चरनजीत सिंह चन्नी और पूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। अब बाकी मंत्री क्या रुख अपनाते हैं, इस पर सभी की नजर रहेगी।

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