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नई दिल्ली, एएनआइ। भारतीय संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में नकारात्मक मुद्दों, खासकर हंगामा और समय की बर्बादी, को लेकर अक्सर रिकॉर्ड बनते रहते हैं। लेकिन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की पहल से 17वीं लोकसभा का पहला सत्र जब इस महीने के आखिर में खत्म होगा तो उसके नाम कई सकारात्मक रिकॉर्ड दर्ज होंगे। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि पहले सत्र में ही पहली बार सांसद बने लगभग सभी सदस्यों को सदन में बोलने का मौका मिल चुका होगा। लोकसभा अध्यक्ष नए सदस्यों को न सिर्फ सदन में अपनी बात रखने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, बल्कि इसके लिए अवसर भी मुहैया कराते हैं।

नई लोकसभा के नए स्पीकर के काम करने का तरीका नायाब है। संसद की कार्यवाहियों में सदस्यों की ज्यादा भागीदारी और उत्पादकता बढ़ाने के लिए वह सदन के समय के प्रभावी उपयोग को लेकर सदस्यों पर परोक्ष दबाव भी बनाते हैं।

लोकसभा के एक अधिकारी ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर कहा, '19 जून से लेकर चार जुलाई के बीच 264 में से 130 नए सदस्यों को सदन में बोलने का मौका मिल चुका था। लोकसभा अध्यक्ष इस कोशिश में हैं कि इस सत्र की समाप्ति तक पहली बार चुन कर आए सभी सदस्यों को बोलने का मौका मिल जाए। यह एक रिकॉर्ड होगा।'

लोकसभा अध्यक्ष के रूप में ओम बिरला पहले ही अपने नाम कई रिकॉर्ड दर्ज कर चुके हैं। सबसे पहला रिकॉर्ड तो यही है कि पिछले महीने लोकसभा के कुछ ही कामकाजी दिनों में सदन में 10 सवाल उठाए गए। अधिकारी ने बताया, 'सदन में प्रत्येक दिन आठ से दस सवाल उठाए जा रहे हैं। पहले अधिक से अधिक पांच से छह सवाल ही उठाए जा पाते थे। एक दिन में शून्य काल के दौरान 84 सदस्यों ने अपनी बात रखी, जिनमें से 49 सदस्य ऐसे थे, जो पहली बार निर्वाचित होकर आए थे।'

लोकसभा अध्यक्ष शून्य काल के दौरान सदस्यों से कम शब्दों में सवाल करने और मंत्रियों से कम से कम शब्दों में सटीक जवाब देने का अनुरोध करते हैं, ताकि समय का ज्यादा से ज्यादा उपयोग किया जा सके।

छोटे दलों को भी मौका देने से वो पीछे नहीं हटते। वर्षो से संसद में काम करने वाले एक अधिकारी ने बताया कि स्पीकर कड़ी मेहनत करने वाले सदस्यों को प्रोत्साहित करते हैं। उन्होंने रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के सदस्य एनके प्रेमचंद्रन को अध्यक्षों के पैनल का सदस्य बनाया है। ऐसा पहली बार हुआ है कि लोकसभा में एक सदस्य वाली पार्टी को अध्यक्ष पैनल में जगह मिली है।

हिंदी के प्रयोग में आगे हैं बिरला
लोकसभाध्यक्ष ओम बिरला ने सदन के संचालन में हिंदीके प्रयोग को लेकर भी सभी का ध्यान खींचा है। तीन तलाक बिल पेश किए जाने के समय उन्होंने दो बार हां पक्ष जीता कहकर अपने फैसले की घोषणा की थी। पहले स्पीकर आइज (प्रस्ताव के समर्थन में) हैव इट, आइज हैव इट या नोज (प्रस्ताव के विरोध में) हैव इट कहकर अपना फैसला सुनाते थे। ओम बिरला के पहले शायद ही किसी स्पीकर ने सदन के संचालन में इस तरह हिंदीका प्रयोग किया हो। बिरला किसी प्रस्ताव को पेश करते हुए भी हिंदीका इस्तेमाल करते हैं और सदस्यों से कहते हैं-जो सदस्य इसके समर्थन में हों वे हां कहें, जो सदस्य इसके विरोध में हों वे ना कहें।

 

Posted By: Tanisk

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