जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। वित्तमंत्री अरुण जेटली ने पूर्ववर्ती यूपीए सरकार पर 'आधार' के प्रति ढुलमुल रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। आधार को 'गेम चेंजर' बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे होने वाली बचत से 'आयुष्मान भारत' जैसी तीन विशाल स्कीमें चलाई जा सकती हैं। मगर यूपीए सरकार ने न सिर्फ इसका विरोध किया, बल्कि अड़ंगे लगाए। वो तो प्रधानमंत्री मोदी थे जिन्होंने अपनी निर्णय क्षमता के बूते इसे सफलतापूर्वक लागू किया।

फेसबुक ब्लॉग पर लिखे अपने लेख 'बेनेफिट्स ऑफ आधार : ह्वेयर इट स्टैंड्स टुडे' में जेटली ने कहा है कि यूपीए सरकार ने अपने विरोधाभासों और अनिर्णय के कारण आधार को आधे-अधूरे मन से लागू किया। इसका श्रेय लेने के बजाय कांग्रेस के वकीलों ने अदालत में स्वयं को प्रौद्योगिकी और आधार विरोधी पैरोकारों के तौर पर पेश किया। यूपीए सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने नंदन नीलेकणी के यूआइडी के विचार को अवरुद्ध किया था और इसे लेकर सरकार में मतभेद थे। प्रधानमंत्री अनिर्णय का शिकार थे। फिर भी बहुत धीमी गति से आधार का नामांकन जारी रहा।

आधार पर संप्रग सरकार का कानून अपर्याप्त था। क्योंकि इसमें प्राइवेसी की सुरक्षा के पर्याप्त उपाय नहीं किए गए थे। इसमें इस बात का भी कोई उल्लेख नहीं था कि आधार का उपयोग किस चीज के लिए किया जाएगा। एनडीए सरकार ने इस मुद्दे की नए सिरे से जांच की और कानून को पूरी तरह बदल दिया गया। नए कानून का सार यह है कि सरकार गरीबों को सब्सिडी देने में बहुत सारा सार्वजनिक धन खर्च करती है। सब्सिडी की राशि अनिश्चित है जो अनजाने लोगों को दी जाती है।

अंगुलियों के निशान पर आधारित बायोमेट्रिक प्रणाली से इसे सही लोगों तक पहुंचाया जा सकता है। सुप्रीमकोर्ट ने आधार की संपूर्ण अवधारणा को मान्यता दी और इन आरोपों को नकार दिया कि इससे प्राइवेसी के अधिकार का उल्लंघन होता है। दो लोगों को इसका विशेष श्रेय जाता है। एक नंदन नीलेकणी और दूसरे डा. अजय भूषण पांडेय जिन्होंने आधार को दिशा देने के साथ विस्तार प्रदान किया।

जेटली के मुताबिक वर्ष 2016 में आधार बिल पारित होने के बाद अब तक के 28 महीनों में 122 करोड़ से ज्यादा आधार नंबर जारी किए जा चुके हैं। अब 18 वर्ष से ऊपर की तकरीबन 99 फीसद वयस्क आबादी के पास आधार कार्डहै।

सब्सिडी पहंुचाने में आधार के उपयोग ने पिछले कुछ वर्षो के दौरान मार्च, 2018 तक 90 हजार करोड़ रुपये की बचत कराई है। विश्व बैंक द्वारा तैयार डिजिटल डिवीडेंड रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि आधार का इस्तेमाल कर भारत हर साल 77 हजार करोड़ रुपये की बचत कर सकता है।

आधार के उपयोग से अनेक नकली और फर्जी लाभार्थी समाप्त हो गए हैं। इसके जरिए अब तक कुल 1,69,868 करोड़ रुपये की सब्सिडी का हस्तांतरण किया जा चुका है। बिचौलियों का खात्मा होने से अब सब्सिडी सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में जाती है। यह अनोखी प्रौद्योगिकी है जिसका उपयोग केवल भारत में किया गया है। इससे बचने वाले पैसों का इस्तेमाल गरीबों की भलाई वाले दूसरे अनेक कार्यो में होता है।

प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना-आयुष्मान भारत का मकसद प्रत्येक परिवार को सालाना पांच लाख रुपये की कवरेज प्रदान करना है। इससे 10.74 करोड़ गरीब परिवारों को अस्पताल में महंगे इलाज और ऑपरेशन की उच्चस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी। सितंबर में इसके लांच होने से अब तक लगभग सात लाख गरीब मरीजों का मुफ्त इलाज हुआ है।

यही नहीं, 'पहल' तथा 'उज्ज्वला' स्कीमों के 22.80 करोड़ लाभार्थियों को रसोई गैस की सब्सिडी सीधे उनके खाते में दी जा रही है। इसके अलावा 58.24 करोड़ राशन कार्ड आधार से जुड़ चुके हैं। साथ ही 10.33 करोड़ 'मनरेगा' कार्डधारकों को भी मजदूरी का पैसा सीधे बैंक खातों में मिल रहा है। आयकर विभाग भी 21 करोड़ पैन कार्ड धारकों को आधार नंबर से जोड़ चुका है।

Posted By: Bhupendra Singh

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