ओमप्रकाश तिवारी, मुंबई। मुंबई में महीने भर से प्रचार में जुटे उत्तर प्रदेश के भाजपा कार्यकर्ताओं को अंतिम दिन उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्यपाल राम नाईक से की शाबासी मिली। पूर्व राज्यपाल ने दर-दर पसीना बहा रहे कार्यकर्ताओं को शनिवार की शाम अपने घर बुलाकर जलपान कराया।

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव का बिगुल बजने से पहले ही जब उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को महाराष्ट्र में चुनाव का उप प्रभारी बनाया गया, तभी यह तय हो गया था कि भाजपा मुंबई सहित पूरे महाराष्ट्र में रहने वाले हिंदी भाषियों को अपने साथ लेकर चलने की रणनीति पर काम कर रही है। जबकि कुछ वर्ष पहले तक यह वर्ग कांग्रेस का प्रतिबद्ध मतदाता माना जाता था। संपूर्ण कार्ययोजना सामने आई तब, जब उत्तर प्रदेश भाजपा के ही संगठन मंत्री शिवकुमार पाठक को विशेष तौर पर हिंदी भाषियों के बीच प्रचार की कमान देकर मुंबई भेजा गया।

उत्तर भारतीयों के बीच किया प्रचार

सांसद, विधायक, मंत्री और संगठन के लोगों को मिलाकर करीब 150 लोग उनके नेतृत्व में भाजपा के लिए प्रचार करने मुंबई पहुंचे और पूरे 25 दिन योजनाबद्ध तरीके से उत्तर भारतीय समाज के बीच जाकर न सिर्फ भाजपा के लिए प्रचार किया, बल्कि उत्तर भारतीयों का एक बड़ा डाटा बैंक भी तैयार किया, जो भविष्य की किसी मुहिम में काम आ सके।

भाजपा सूत्रों के अनुसार पूरे महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों में से 81 क्षेत्रों में उत्तर भारतीयों का बोलबाला है। मुंबई-ठाणे-रायगढ़ परिसर में तो इनकी आबादी 35 फीसद से ज्यादा है। इनमें भी ज्यादा संख्या पूर्वी उत्तर प्रदेश से आए लोगों की है। मुंबई के 17, कोंकण के 11 और पुणे के छह विधानसभा क्षेत्र इनमें प्रमुख हैं। ऐसे सभी विधानसभा क्षेत्रों में वहां रह रहे समाज को देखते हुए रणनीति तैयार की गई, और हर-हर विधानसभा क्षेत्र में उत्तर प्रदेश से आए किसी न किसी नेता के साथ छह से आठ तक संगठन के कार्यकर्ताओं को लगाया गया।

कार्यक्रमों के साथ लिट्टी चोखा का आयोजन

ये लोग सुबह से शाम तक छोटे-छोटे समूहों में लोगों के घर-घर जाकर संपर्क करते रहे। शाम का समय कहीं न कहीं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ लिट्टी-चोखा के आयोजन के लिए निर्धारित होता था। जहां एक साथ दो-तीन सौ लोगों को जुटाकर अपनी बात कही जा सके। यहां निरहुआ और सुरेश शुक्ल के लोकसंगीत के साथ हर वर्ग के लोग एक साथ बैठकर स्वादिष्ट भोजन का आनंद लेते देखे जाते थे। इन बैठकों में जातिबंधन भी टूटता दिखाई दिया।

भाजपा आर्थिक प्रकोष्ठ के संयोजक एपी सिंह बताते हैं कि उत्तर प्रदेश से आए नेताओं-कार्यकर्ताओं का समूह महाराष्ट्र प्रदेश भाजपा को छेड़े बिना अपनी मुहिम में लगा रहा। कार्यक्षेत्र का निर्धारण शिवकुमार पाठक के स्तर पर होने के बाद यदि स्थानीय प्रत्याशी ने रहने की व्यवस्था कर दी तो ठीक, वरना वह भी खुद ही कर ली जाती थी। जहां भाजपा के उम्मीदवार हैं, वहां तो काम करना अपनी जिम्मेदारी थी। जहां सहयोगी दल शिवसेना के उम्मीदवार हैं, वहां बुलाए जाने पर प्रचार के लिए जाया जाता था। जैसे वसई-नालासोपारा क्षेत्र में शिवसेना उम्मीदवार एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा के लिए भी उत्तर प्रदेश से आए भाजपा कार्यकर्ताओं ने जमकर काम किया। कल्याण के भी कुछ शिवसेना उम्मीदवारों के लिए ये प्रचारक काम करते देखे गए।

उत्तर भारतीय समाज को भाजपा से जोड़ने का लक्ष्य

उत्तर प्रदेश से ही आए भाजपा प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य डॉ. सीताशरण त्रिपाठी कहते हैं हम यहां भाजपा को जिताने भर के लिए नहीं आए हैं। सरकार तो यहां वैसे भी भाजपा-शिवसेना की ही बन रही है। हम तो यहां चुनाव के बहाने संपूर्ण उत्तर भारतीय समाज को भाजपा से जोड़ने आए हैं। इस मुहिम में अपनी बात उत्तर भारतीय समाज से कही गई, और उनकी बात सुनी भी गई। लोगों को यह शिकायत करते भी सुना गया कि सिर्फ चुनाव में हमारी याद आती है, बाद में कोई पुछता नहीं।

तिवारी कहते हैं कि मुंबई में रह रहे हिंदी भाषियों की यह शिकायत गंभीरतापूर्वक नोट की गई है। इसे ऊपर तक पहुंचाया भी जाएगा। भाजपा के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता डॉ. तिवारी की बात का समर्थन करते हुए बताते हैं कि इस दौरान करीब 10 लाख उत्तर भारतीयों के मोबाइल नंबर और उनका विवरण नोट किया गया है। यह डाटा बैंक भविष्य में उत्तर भारतीयों से भाजपा का रिश्ता कायम रखने में मददगार सिद्ध होगा।

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Posted By: Dhyanendra Singh

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