विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 16, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

विश्वविद्यालय अपनी मनमर्जी से अब नहीं चला सकेंगे आनलाइन कोर्स

By Tilak RajEdited By:
Published: Tue, 16 Jan 2018 09:33 PM (IST)Updated: Wed, 17 Jan 2018 08:35 AM (IST)

शिक्षा में सुधार को लेकर राज्यों के साथ होने वाले कैब की यह बैठक पिछले दो दिनों से दिल्ली में ...और पढ़ें

विश्वविद्यालय अपनी मनमर्जी से अब नहीं चला सकेंगे आनलाइन कोर्स
विश्वविद्यालय अपनी मनमर्जी से अब नहीं चला सकेंगे आनलाइन कोर्स

नईदिल्ली, जागरण ब्यूरो। विश्वविद्यालय अपनी मनमर्जी से अब आनलाइन कोर्स नहीं चला सकेंगे। सरकार ने आनलाइन शिक्षा की गुणवत्ता को विश्वसनीय बनाने के लिए इसे देश के सिर्फ 15 फीसदी शीर्ष विश्वविद्यालयों में ही चलाने का फैसला लिया है। विश्वविद्यालयों का चयन नैक (राष्ट्रीय मूल्याकंन एवं प्रत्यापन परिषद) की रैकिंग के आधार पर होगा। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इसकी घोषणा करते हुए बताया कि इसे लेकर जल्द ही एक नियामक (रेगुलेशन) तैयार किया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री जावड़ेकर मंगलवार को कैब की 65वीं बैठक के बाद पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने बताया कि इसके साथ ही देश में मौजूदा समय में जिन विश्वविद्यालयों में आनलाइन कोर्स संचालित हो रहे है, उन्हें अपनी रैकिंग ठीक करने के लिए दो साल का समय मिलेगा। इसके बाद भी यदि उनकी रैकिंग में सुधार नहीं आया, तो इन कोर्सो को बंद कर दिया। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि आनलाइन शिक्षा को लेकर नियामक का प्रारूप एक महीने के भीतर तैयार हो जाएगा। इसके अलावा आनलाइन शिक्षा के जरिए अब डिग्री, डिप्लोमा और सर्टीफिकेट सभी तरह के कोर्स संचालित हो सकेंगे। वहीं तकनीक शिक्षा को इससे अलग रखा गया है।

एक सवाल के जवाब में जावड़ेकर ने बताया कैब की बैठक में भी उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सकल नामांकन दर (जीईआर) बढ़ाने को लेकर चर्चा हुई है। इसे 25 फीसदी से बढ़ाकर 32 फीसदी तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। राज्यों से जल्द ही योजना बनाकर पेश करने को कहा गया है। उन्होंने बताया कि बैठक में राज्यों के साथ उच्च शिक्षा में क्षेत्रीय विभिन्नताओं को खत्म करने को लेकर भी चर्चा हुई है। इस दौरान नए कालेज खोलने सहित आनलाइन शिक्षा को बढ़ावा देने को लेकर चर्चा हुई है।

गौरतलब है कि शिक्षा में सुधार को लेकर राज्यों के साथ होने वाले कैब की यह बैठक पिछले दो दिनों से दिल्ली में चल रही है। इनमें 22 राज्यों के शिक्षा मंत्री सहित 29 राज्यों में हिस्सा लिया था। इस दौरान सभी राज्यों में अपनी दिक्कतें भी गिनाई।

यह भी पढ़ें: असर की रिपोर्ट में खुलासा, 25 फीसद युवा नहीं पढ़ पाते कोई भी सरल पाठ