नई दिल्ली, पीटीआइ। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने गुरुवार को राज्यसभा में कहा कि सरकार कोरोना से मृत्युदर को एक फीसदी से नीचे लाने के लक्ष्य पर काम कर रही है। वर्तमान में भारत में यह दर करीब 1.64 फीसद है जो दुनिया में अभी भी सबसे कम है। राज्यसभा में हर्षवर्धन ने चर्चा के दौरान बताया कि देश में ठीक होने की दर फिलहाल 78 से 79 फीसद के बीच है। दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले यह दर सबसे बेहतर है। भले ही देश में संक्रमितों की संख्या 50 लाख से अधिक हो गई हो लेकिन सक्रिय मामलों की संख्या इसकी प्रतिशत से भी कम है।

अगले साल की शुरुआत तक आ जाएगी वैक्‍सीन

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि देश में कोरोना से मरने वालों की संख्या कई यूरोपीय देशों के मुकाबले काफी कम है। वहीं सरकार जांच की दर अमेरिका से भी बेहतर करना चाहती है। उन्होंने कहा कि इस बात की संभावना है कि अगले साल की शुरुआत तक देश में कोरोना की वैक्सीन आ जाए लेकिन तब तक लोगों को शारीरिक दूरी के नियम का पालन करने के साथ मास्क भी पहनना चाहिए।

हर दिन 11 लाख जांचें हो रहीं

उन्होंने कहा कि बहुतेरे विदेशी विशेषज्ञों ने आशंका जताई थी कि जुलाई अगस्त तक देश में 30 करोड़ लोग कोरोना से संक्रमित हो जाएंगे जिसमें से पचास से साठ लोग दम तोड़ देंगे। 135 करोड़ लोगों के देश में इस समय हम प्रतिदिन करीब 11 लाख जांच कर रहे हैं। यह बीमारी के खिलाफ हम लोगों के सामूहिक प्रयास से ही संभाव हो पाया है।

तीन वैक्‍सीन का चल रहा ट्रायल

वैक्सीन विकसित करने की बात पर उन्होंने कहा कि विज्ञान एवं तकनीकी मंत्रालय, आइसीएमआर और दवा कंपनियां मिलकर इस पर काम कर रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खासतौर से इस पर नजर रखे हुए हैं। देश में फिलहाल तीन वैक्सीन दूसरे और तीसरे चरण के ट्रायल से गुजर रही हैं। भारत दुनिया के गिने-चुने देशों में से एक है जिसने कोरोना वायरस को अलग-थलग करने में सफलता पाई है।

'प्रभावी स्वास्थ्य प्रणाली विकसित करने की जरूरत'

वहीं जी-20 वित्त और स्वास्थ्य मंत्रियों की एक संयुक्त बैठक को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से संबोधित करते हुए हर्षवर्धन ने कहा कि वर्तमान महामारी और इससे उत्पन्न वैश्विक संकट, जो पहले से कहीं अधिक है के लिए राष्ट्रीय और वैश्विक एकजुटता की आवश्यकता है।

प्रभावी स्वास्थ्य प्रणाली विकसित करना जरूरी

केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने कहा कि कोरोना के मामलों में वैश्विक स्तर पर आ रहे उछाल को कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय, बहु-क्षेत्रीय सहयोगात्मक प्रयासों की आवश्यकता होगी ताकि स्वास्थ्य प्रणाली में जटिल मामलों से निपटने के लिए पर्याप्त क्षमता हो। साथ ही महामारी से निपटने की तैयारियों को बेहतर बनाने के वास्ते प्रभावी स्वास्थ्य प्रणाली विकसित करना जरूरी है। 

जीतेगा भारत हारेगा कोरोन

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