बरेली, जेएनएन : संसद में तीन तलाक के बिल का विरोध करने की मांग को लेकर बुधवार को बरेली के उलमा ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद अहमद पटेल से मुलाकात की। मांग पत्र सौंपा। इसमें उलमा ने स्वीकारा कि एक बार में तीन तलाक अमानवीय है मगर, सुन्नी हनफी के न्यायशास्त्र की मान्यता है कि एक बार में तीन तलाक देने से तलाक हो जाती है। ऐसे में बिल को रोका जाना चाहिए। यह शरीयत को खिलाफ है।

रजा अकादमी के अध्यक्ष मुहम्मद सईद नूरी ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा मुस्लिम समुदाय के खिलाफ लाए गए बिल का विरोध किया है। इसलिए हमारी मांग है कि भाजपा के लाए जा रहे तीन तलाक बिल का भी विरोध हो। ऑल इंडिया तंजीम उलमा-ए-इस्लाम के महासचिव मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि अहमद पटेल ने बिल का समर्थन न करने का भरोसा दिया है।

भाजपा आज पेश करेगी बिल

तीन तलाक पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार अध्यादेश लाई थी। इसकी मियाद छह माह की थी। छह माह में बिल संसद से मंजूर कराना था। गुरुवार को भाजपा सदन में तलाक का बिल पेश कर सकती है।

तीन तलाक का मसला महिलाओं की सुरक्षा-हक का मुद्दा : निदा

तीन तलाक का मसला महिलाओं की सुरक्षा-हक का मुद्दा है। उन्होंने सामाजिक दायरे से आगे बढ़कर अपनी सुरक्षा मांगी है। तलाक पर कानून बने। इसका पालन कराया जाए। अभी जो पीडि़त महिलाएं हैं उनके और बच्चों के संरक्षण की व्यवस्था की जाए। भविष्य में जिन महिलाओं को तलाक हो, उन्हें प्रशिक्षित कर रोजगार से जोडऩे का प्रावधान किया जाए। -निदा खान, अध्यक्ष आला हजरत हेल्पिंग सोसायटी


बिल का विरोध करने वाले महिला उत्पीडऩ विरोधी : फरहत

पीडि़ताओं ने जिस तरह से अपनी लड़ाई लड़ी है। उम्मीद है कि उन्हें इंसाफ मिलेगा। इसे राजनीतिक मसला न समझकर महिलाओं के हक के तौर पर लिया जाए। सख्त कानून बने। कानून का दुरुपयोग न हो, इसका भी ख्याल रखा जाए ताकि गुनाह करने वालों को ही सजा मिले। बिल का विरोध करने वाले महिला उत्पीडऩ विरोधी हैं। - फरहत नकवी, मेरा हक फाउंडेशन  

Posted By: Abhishek Pandey

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