जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। गुरुवार को नई दिल्ली में भारत और अमेरिका के बीच होने वाली पहली टू प्लस टू वार्ता भारत व पाकिस्तान के आपसी रिश्तों की भावी दिशा भी तय कर सकती है। ट्रंप प्रशासन आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान पर लगातार दबाव बनाये हुए है लेकिन कई बार उसकी तरफ से यह संकेत भी दिया जा चुका है कि वह भारत व पाकिस्तान के बीच रिश्तों को सुधारने का भी इच्छुक है। कूटनीतिक सूत्रों के मुताबिक अमेरिका व भारत के बीच इस बात को लेकर चिंता है कि पाकिस्तान पूरी तरह से चीन व रूस के बीच पनप रहे गठबंधन का एक अहम हिस्सा न बन जाये।

पाकिस्तान के चीन व रूस के पाले में जाने को लेकर अमेरिका चिंतित, भारत आशंकित

अमेरिका के विदेश सचिव माइकल पोंपियो बुधवार को देर रात नई दिल्ली इस्लामाबाद होते हुए पहुंचे है। पाकिस्तान में उनकी पीएम इमरान खान और विदेश मंत्री शाह मेहमूद कुरेशी के साथ बातचीत हुई है। कूटनीतिक सूत्रों के मुताबिक पोंपियो की पाकिस्तानी हुक्मरानों के साथ हुई मुलाकात पर टू प्लस टू वार्ता में चर्चा की जाएगी। पाकिस्तान के साथ भारत के रिश्ते अमेरिका व भारत के व्यापक रणनीतिक रिश्तों पर भी असर डालेंगे।

अमेरिका की चाहत है कि भारत अपनी सैन्य तैयारियों को हिंद-प्रशांत महासागर की चुनौतियों के मद्देनजर तैयार करे जबकि वह यह भी चाहता है कि पाकिस्तान अफगानिस्तान में शांति व वहां के आतंकियों को हराने में ज्यादा से ज्यादा ध्यान दे। जाहिर है कि यह काम तभी होगा जब भारत व पाकिस्तान की सेनाओं एक दूसरे पर तैनात न हो।

बुधवार को पोंपियो से मुलाकात के बाद विदेश मंत्री कुरेशी ने संवाददाता सम्मेलन में इस बारे में अमेरिकी प्रस्ताव का परोक्ष तौर पर खुलासा भी किया। कुरेशी ने कहा कि, अगर पूर्वी सीमा (भारत के साथ) पर हमारे साथ छेड़छाड़ होगी तो हम पश्चिमी (अफगानिस्तान के साथ) सीमा पर कैसे ज्यादा ध्यान दे सकेंगे?

भारतीय विदेश मंत्रालय के अधिकारी भी पूर्व में पाकिस्तान, चीन व रूस के बीच किसी गठबंधन बनने के आसार पर अपनी चिंता जता चुके हैं। भारत व अमेरिका के रिश्तों के लगातार प्रगाढ़ होते देख रूस ने इधर कई बार कहा है कि वह पाकिस्तान के साथ सैन्य सहयोग बढ़ाने को तैयार है। कूटनीतिक जानकार लंबी अवधि में इसे भारत के हितों के लिहाज से बहुत अच्छा नहीं मानते हैं। वैसे भी पाकिस्तान में नई सरकार आने के बाद भारत के साथ उसके रिश्तों को लेकर कुछ सुगबुगाहट दिखाई दी है।

पीएम नरेंद्र मोदी ने न सिर्फ पीएम खान से टेलीफोन पर बात की है बल्कि उन्हें एक पत्र भी लिखा है जिसमें कहा है कि, 'भारत पाकिस्तान के साथ एक अच्छे रिश्ते बनाने को लेकर वचनबद्ध है। इस क्षेत्र की जनता की भलाई के लिए दोनों देशो के बीच सार्थक व रचनात्मक सहयोग होना चाहिए।'

दूसरी तरफ पीएम खान पहले ही कह चुके हैं कि अगर भारत की तरफ से शांति बहाली के लिए एक कदम बढ़ाया जाता है तो वह दो कदम चलने के लिए तैयार है। भारत व पाकिस्तान के बीच अंतिम आधिकारिक वार्ता दिसंबर, 2015 में इस्लामाबाद में हुई थी। उसके बाद पठानकोट सैनिक ठिकाने पर पाकिस्तान परस्त आतंकियों के हमले के बाद भारत ने बाकी वार्ताओं को टाल दिया था।

Posted By: Bhupendra Singh