नई दिल्ली, पल्लवी मिश्रा। ट्विटर, आज सोशल मीडिया का वो माध्यम बन चुका है जो हरेक से जुड़ा है। कभी जनता के लिए यह सोशल मीडिया का माध्यम मीडिया बन जाता है तो कभी सरकारों के लिए बात पहुंचाने का जरिया। सेलिब्रिटीज के लिए फैन्स से जुड़ने का जरिया तो लोगों के लिए एक विषय पर सामूहिक विचार रखने का माध्यम। आज ट्विटर विभिन्न तरह से हमारे बीच पहुंच बना चुका है। इस लोकप्रिय माध्यम के बारे में और जानने के लिए जागरण ने बात की ट्विटर इंडिया की पॉलिसी हेड महिमा कौल और ग्लोबल पॉलिसी हेड कॉलिन क्रोवेल से। 

सवालः ट्विटर लगातार अपने आप में बदलाव करता रहा है, चाहे बात ट्विटर मोमेंट्स की हो या ट्विटर न्यूज की या फिर लाइव नोटिफिकेश्नस की। ऐसे में और यूजर भविष्य में क्या बड़े सुधार या तोहफे की उम्मीद करें?

कॉलिनः मुझे ट्विटर ज्वाइन किए सात साल से ज्यादा हो चुके हैं। तब ट्विटर पर 140 शब्द की सीमा थी और अगर किसी लिंक पर करते थे तो यह कहीं और ले जाता था। लेकिन आज ट्विटर पर 280 शब्द लिख सकते हैं और यह फोटोज़, वीडियोज से भी भरपूर है। इतना ही नहीं आप सिर्फ अपने फोन से ट्विटर पर लाइव हो सकते हैं। इस तरह विभिन्न मीडिया का (फोटो, वीडियो) का शब्दों के साथ एकीकरण (इंटीग्रेशन) वो चीज है हम चाहते हैं कि ट्विटर का यूजर अनुभव करे। निश्चत रूप से चुनावों को देखते हुए हम लाइव और वीडियो को बढ़ाएंगे। वीडियो को और बढ़ावा दिया जाएगा और आने वाले दिनों में और भी चीजें देखने को मिलेंगी। इस सिलसिले में ट्विटर कई तरह के लाइव कार्यक्रम आयोजित करेगा। जिनमें चौपाल, पावर ऑफ 18 जैसे प्रयास शामिल हैं। 

सवालः क्या आप ट्विटर के यूजर बेस पर कोई आंकड़ा साझा कर सकती हैं, क्या ट्विटर अभी भी शहरों तक सीमित है या ग्रामीण इलाकों में भी पहुंच गया है?

कॉलिनः पिछले कुछ सालों और कुछ चुनावों पर नजर डालें तो तकनीक की वजह से ट्विटर यूजर बेस में बहुत बढ़ोतरी हुई है। अब ट्विटर यूजर का नेचर शिफ्ट हो गया है। स्थानीय भाषाओं के ट्वीट में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। अगर आप ईयरएंडर पर नजर डालेंगे तो पाएंगे कि टॉप 10 में 6 हैशटैग स्थानीय भाषाओं के थे। हम ट्विटर पर लोगों के बीच बातचीत का तरीका भी बदलता देख रहे हैं। अब लोग स्थानीय भाषाओं में अच्छे से विचार रख पाते हैं। जहां तक स्थानीय लोगों तक पहुंच और उन्हें संवाद में शामिल करने की बात है तो स्थानीय राजनेताओं के जरिए यह संभव होगा। हम इसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इसी सवाल पर महिमा कहती हैं, 'अब ट्विटर बहुत सी भाषाओं में उपलब्ध है और जल्द ही इस क्षेत्र में भी बहुत अच्छा प्रदर्शन करेगा। 

सवालः आपका क्या मानना है कि ट्विटर सेवा अपने उद्देश्य में कामयाब रही, सरकार का कौन सा विभाग ट्विटर पर सबसे ज्यादा एक्टिव है?

महिमाः ट्विटर सेवा एक सीधे-साधे गणित पर आधारित है कि क्या ट्विटर को सरकार समस्याएं सुनने और सुलझाने के माध्यम के रूप में प्रयोग कर सकती है या नहीं। कोई भी विभाग जो नागरिकों से सीधे संवाद में शामिल होता है, वो ट्विटर सेवा का हिस्सा बन सकता है। सभी विभागों ने अच्छा किया है लेकिन इस मामले में सुषमा स्वराज ने टॉप किया है। यूपी पुलिस भी बहुत सक्रिय है।

सवालः चूंकि ट्विटर भारत में सांस्कृतिक बातचीत का भी महत्वपू्र्ण हिस्सा बन रहा है ऐसे में यह गलत सूचना, ध्रुवीकरण और फर्जी समाचारों की जगह भी बन रहा है। इस सबसे निपटने के लिए आपकी क्या रणनीति है?

जवाबः ट्विटर की सबसे बड़ी खूबी ये है कि यह एक सार्वजनिक मंच है और इसका मतलब है कि यहां लोग एक-दूसरे से बातचीत कर सकते हैं। हालांकि हम इस बात को लेकर भी जागरूक हैं कि इस खुलेपन का फायदा तथ्यों को तोड़ने-मरोड़ने के लिए भी उठाया जा सकता है। लोग जब तथ्यों से छेड़छाड़ करते हैं तो एक विशेष पैटर्न होता है। ज्यादातर ये फर्जी खातों या ऑटोमेशन के जरिए किया जाता है। हम ऐसे खातों की पहचान के लिए तकनीक का सहारा ले रहे हैं। ट्विटर पर एक दिन में करीब 500 मिलियन ट्वीट किए जाते हैं। इसीलिए इससे निपटने को हमें तकनीक में निवेश करना होगा और तकनीक हमें परिणाम लाकर भी दे रही है। हम करीब 10 मिलियन खातों की हर हफ्ते पहचान कर रहे हैं।

सवालः दुनियाभर के देशों से आपने क्या सीखा है जो कि इस बार भारत के चुनावों में लागू कर सकते हैं ताकि ट्विटर को और अधिक उत्तरदायी और भरोसेमंद बनाया जा सके। 

कॉलिनः हमने सीखा है कि चुनाव आयोग के अधिकारियों के साथ मिलकर काम करना और लोगों को संवाद के लिए मंच उपलब्ध कराना। भारत में भी हम चुनाव आयोग के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं। लेकिन हम भारत में एक चीज और लेकर आ रहे हैं जो कि कहीं और नहीं लाए थे वो है एड ट्रांसपेरेंसी सेंटर। जहां हम राजनीतिक विज्ञापनों के बारे में और जानकारी मुहैया कराएंगे। हम राजनीतिक विज्ञापन पर दर्शाएंगे कि उक्त विज्ञापन को किसने स्पॉन्सर किया है और इसके लिए कितने पैसे खर्च किए हैं। 

सवालः ट्विटर पर ट्रोलिंग पिछले कुछ सालों में काफी बढ़ी है। ट्रोलर्स से निपटने के लिए ट्विटर क्या रणनीति बना रहा है?

कॉलिनः पिछले 2 सालों में हमने सुरक्षा को कंपनी की पहली प्राथमिकता बनाया है। हमने इन दो सालों में 30 विभिन्न नीतियों और बदलावों के जरिए ट्विटर को और अधिक सुरक्षित बनाया है। अब यूजर के पास तरीके और साधन हैं, जिससे कि वह अपने अकाउंट को और अधिक सुरक्षित बना सकता है। हम सुरक्षा समूहों के साथ मिलकर भी इस दिशा में काम कर रहे हैं। इतना ही नहीं हमने महिलाओं को भी प्रशिक्षण देने के लिए बहुत से कदम उठाए है। हम चाहते हैं कि लोग जब ट्विटर यूज करें तो सुरक्षित भी महसूस करें। इसी सवाल के जवाब में महिमा कहती हैं, 'ट्विटर एप में अब बहुत सी सेटिंग्स हैं। फिल्टर्स का प्रयोग करके भी सेफ रहा जा सकता है। आज हम एक साल पहले की तुलना में 10 गुणा ज्यादा अकाउंट्स के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं।'

Posted By: Vikas Jangra

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