अगरतल्‍ला, एजेंसियां। त्रिपुरा में मई 2023 में विधानसभा चुनाव होने हैं। उससे पहले राज्‍य की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने शनिवार को इस्तीफा दे दिया। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य को अपना इस्तीफा सौंप दिया। केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता भूपेंद्र यादव और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में त्रिपुरा में हैं। बिप्लब कुमार देब की जगह लेने वाले नए नेता की घोषणा आज शाम की जाएगी।

त्रिपुरा पहुंचे केंद्रीय मंत्री और भाजपा के केंद्रीय पर्यवेक्षक भूपेंद्र यादव ने कहा कि रात आठ बजे विधायक दल की बैठक होगी। नए नेता का चुनाव किया जाएगा। बिप्लब कुमार देब ने 2018 में त्रिपुरा में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के 25 साल के शासन को समाप्त करते हुए राज्य में भारतीय जनता पार्टी के पहले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। सूत्रों ने बताया कि भाजपा विधानसभा चुनाव में नए चेहरे के साथ उतरना चाहती है और बिप्लब देव को सांगठनिक कार्य में लगाया जाएगा। देब को बदलने के लिए एक नए नेता के फैसले की घोषणा शाम को होने की संभावना है।

फरवारी के महीने में भाजपा विधायक सुदीप राय बर्मन और आशीष साहा ने त्रिपुरा विधानसभा से इस्तीफा दे दिया था और अपनी पार्टी की सदस्यता भी छोड़ दी। बाद में उन्‍होंने त्रिपुरा के सीएम बिप्लब कुमार देब पर आरोप लगाया था। दोनों विधायक बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए थे।

पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सुदीप राय बर्मन ने कहा था कि इस्तीफा देने के बाद मुझे राहत मिली है क्योंकि मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब के नेतृत्व वाली सरकार उम्मीदों पर खरा उतरने में बुरी तरह विफल रही है। त्रिपुरा में लोकतंत्र का गला घोंट दिया गया है और किसी को भी बोलने की अनुमति नहीं है।

उन्‍होंने कहा था कि एक मुखिया और कुछ अधिकारी त्रिपुरा में एक निरंकुश सरकार चला रहे हैं, जहां लोगों की आवाज सुनने वाला कोई नहीं है। मंत्रियों को स्वतंत्र रूप से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने की अनुमति नहीं है। हम लोकतंत्र को हाईजैक करने की साजिश को नाकाम करेंगे। राय बर्मन ने दावा किया था कि राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार अगले विधानसभा चुनाव से पहले अल्पमत में आ जाएगी क्योंकि कई विधायक हताशा में पार्टी छोड़ने की योजना बना रहे हैं।

Edited By: Arun Kumar Singh