नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। सरकार विपक्ष के तगड़े विरोध की वजह से मुस्लिम महिलाओं को एक साथ तीन तलाक से निजात दिलाने संबंधी बिल सोमवार को राज्यसभा में पेश करने में नाकाम रही। तीन तलाक बिल में संशोधन की मांग करते हुए एकजुट विपक्ष इसे सिलेक्ट कमिटी को भेजने पर अडिग है। वहीं एनडीए सरकार लोकसभा से पारित बिल में बदलाव के लिए तैयार नहीं। राज्यसभा में इसी पर हुई जमकर रस्साकशी की वजह से तीन तलाक बिल पेश नहीं हो सका। सरकार 2 जनवरी को फिर बिल पेश करने की कोशिश करेगी मगर 13 दलों की बिल को सिलेक्ट कमिटी में भेजने के प्रस्ताव को देखते हुए राज्यसभा में पारित होने की गुंजाइश कम ही है। विपक्ष के रुख को सरकार ने बिल पारित कराने में अड़ंगा करार दिया है।

राज्यसभा में तीन तलाक बिल को दोपहर 2 बजे पेश किए जाने का उपसभापति हरिवंश ने जैसे ही उल्लेख किया विपक्षी सदस्यों ने सिलेक्ट कमिटी में भेजने के अपने प्रस्ताव पर पहले चर्चा की मांग की। सत्तापक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच इस पर नोंकझोंक शुरू हुई तो अन्नाद्रमुक के सांसद वेल में जाकर नारेबाजी करने लगे। नियम 125 के तहत दिए अपने प्रस्ताव का जिक्र करते हुए तृणमूल कांग्रेस नेता डेरेक ओब्रायन ने कहा कि 15 पार्टियों के सांसद बिल की कुछ खामियों को सुधारने के लिए इसे सिलेक्ट कमिटी में भेजने को लेकर एकमत हैं। इसीलिए आसन को बिल पेश करने की अनुमति देने से पहले उनके प्रस्ताव पर सदन की भावना जाननी होगी। विपक्ष के साथ एनडीए के कुछ समर्थक दलों के बिल को सिलेक्ट कमिटी में भेजने के रुख से साफ था कि आंकड़ों के हिसाब से सरकार के पास सदन में बहुमत नहीं है। डेरेक ने कहा कि विपक्ष बिल का विरोध नहीं कर रहा बल्कि हम खामियों को दुरूस्त करना चाहते हैं।

इस रस्साकशी के बीच विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने डेरेक का समर्थन करते हुए कहा कि संपूर्ण विपक्ष ने सिलेक्ट कमिटी में भेजने का प्रस्ताव दिया है और इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती। सरकार पर संसदीय नियम परंपराओं को ध्वस्त करने का आरोप लगाते हुए आजाद ने कहा कि 1993 के बाद से अब तक कोई भी बिल स्थाई समिति या सिलेक्ट कमिटी को चर्चा के लिए भेजी जाती रही है। यह पहला मौका है कि बिल को स्थाई समिति को नहीं भेजा गया। कांग्रेस नेता ने कहा कि इस बिल से करोड़ों लोगों की जिंदगी में फर्क पड़ेगा इसलिए सिलेक्ट कमिटी में चर्चा जरूरी है।

संसदीय कार्य राज्यमंत्री विजय गोयल ने इस पर विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वह बिल को लटकाना चाहता है और सिलेक्ट कमिटी के हथियार का इस्तेमाल कर रहा। लोकसभा में कांग्रेस के पहली बार में समर्थन और पिछले हफ्ते वाकआउट करने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस का रुख दोहरा है। गोयल ने विपक्ष पर तीन तलाक बिल पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि देश में यह संदेश जाना चाहिए कि विपक्ष मुस्लिम महिलाओं को कुप्रथा से छुटकारा दिलाने में रूकावट डाल रहा है। हंगामे की वजह से सदन की बैठक 15 मिनट स्थगित होने के बाद दुबारा शुरू हुई तो गोयल पर कांग्रेस के आनंद शर्मा ने पलटवार करते हुए इस बिल के जरिये सरकार पर राजनीति करने का आरोप लगाया। शर्मा ने कहा कि कांग्रेस बिल का विरोध नहीं कर रही मगर राज्यसभा कोई रबर स्टांप नहीं है। यदि लोकसभा ने खामियों पर चर्चा नहीं की तो यह सदन भी उसी राह पर चले जरूरी नहीं।

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि विपक्ष का कोई सुझाव है तो हम चर्चा के लिए तैयार हैं मगर इंसानियत के नाते इस बिल को पारित किया जाना चाहिए। हंगामे में पक्ष और विपक्ष के अपने रुख से पीछे नहीं हटता देख उपसभापति हरिवंश ने 2 जनवरी तक सदन को स्थगित कर दिया।

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