जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। वसंत विहार सामूहिक दुष्कर्म मामले के एक दोषी विनय शर्मा की दया याचिका राष्ट्रपति के पास पहुंचने के बाद तिहाड़ जेल प्रशासन इस मामले से जुड़े सभी दोषियों पर 24 घंटे नजर रख रहा है। इस मामले में अक्षय, मुकेश, विनय शर्मा और पवन को मौत की सजा मिली हुई है। अक्षय व मुकेश तिहाड़ के जेल नंबर दो में बंद हैं तो विनय शर्मा जेल नंबर चार में बंद है।

अभियुक्तों पर जेल प्रशासन की नजर

तिहाड़ जेल सूत्रों ने बताया कि शुक्रवार को अक्षय और मुकेश की दिनचर्या अन्य दिनों की तरह ही रही, लेकिन वे किसी से बात करते नहीं देखे गए। इन दोनों ने किसी भी कार्य में भाग नहीं लिया। इन दोनों पर नजर रखने के लिए एक जवान सेल के बाहर तैनात है। जेल नंबर चार में बंद विनय शर्मा पर भी जेल प्रशासन पूरी नजर रख रहा है। विनय शर्मा से मिलने के लिए जेल के एक वरिष्ठ अधिकारी शुक्रवार को गए थे और उससे बातचीत की थी। विनय शर्मा पर नजर रखने के लिए एक वार्डन के साथ एक जवान को भी तैनात किया गया है। पवन मंडोली के जेल नंबर-14 के हाई सिक्योरिटी वार्ड में बंद है।

निर्भया के माता-पिता की राष्ट्रपति से अपील, खारिज करें दया याचिका

इस बीच, निर्भया के माता-पिता ने राष्ट्रपति से दया याचिका खारिज करने की मांग की है। उन्होंने राष्ट्रपति को भेजे पत्र में लिखा है कि यह दया याचिका न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने और मौत की सजा में देरी करने के लिए डाली गई है। उन्होंने लिखा है कि घटना के बाद से पूरा परिवार सदमे में है और न्याय का इंतजार लंबा ही होता जा रहा है। उन्होंने मांग की कि सभी दोषियों को जल्द फांसी की सजा दी जाए।

हैदराबाद एनकाउंटर को सराहा

हैदराबाद में सामूहिक दुष्कर्म के चारों आरोपितों का पुलिस की ओर से एनकाउंटर करने पर निर्भया के माता-पिता ने खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि तेलंगाना पुलिस ने बहुत ही अच्छा काम किया है। अगर ये चारों आरोपित भागने में सफल हो जाते तो सभी पुलिस से यही सवाल पूछते कि ये पुलिस हिरासत से भागने में कैसे कामयाब हो गए। ऐसे में एनकाउंटर के अलावा और कोई रास्ता भी नहीं बचा था। इस मामले में पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।

मैं सात वर्ष से न्याय के लिए इंतजार कर रही हूं- निर्भया के माता-पिता

निर्भया के माता-पिता ने कहा कि मैं सात वर्ष से न्याय के लिए इंतजार कर रही हूं। मैं उस पीड़ा को समझ सकती हूं जिस पीड़ा से हैदराबाद में पीडि़ता के माता-पिता गुजर रहे होंगे। उन्हें न्याय के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ा। 

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