नई दुनिया, ग्वालियर। अपनी डील के साथ ही विवादों से जुड़े राफेल विमान शनिवार को मध्य प्रदेश के ग्वालियर एयरबेस पर पहुंचे हैं। ये विमान ऑस्ट्रेलिया से एक युद्घ अभ्यास के बाद ग्वालियर एयरफोर्स में प्रशिक्षण के लिए आए हैं।  रविवार से शुरू हुए तीन दिवसीय प्रशिक्षण में फ्रांस एयरफोर्स के पायलट एयरबेस पर भारतीय वायुसेना के पायलटों को न केवल राफेल के संबंध में जानकारी देंगे बल्कि भारतीय वायुसेना के सुखोई विमान को उड़ाकर दोनों विमानों के बीच का अंतर भी समझाएंगे। इस दौरान संयुक्त अभ्यास के लिए कुछ पायलटों का चयन भी किया जाएगा।

36 राफेल लड़ाकू विमानों के लिए सौदा
2016 में भारत ने फ्रांस से 36 राफेल विमान खरीदने के लिए सौदा किया था। पर लड़ाकू विमान अपनी विशेषता से ज्यादा अपनी महंगी डील के लिए चर्चित रहा है। केंद्र में विपक्षी दल कांग्रेस लगातार इस डील पर सवाल खड़े करती आई है। इसके बावजूद यह विमान भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है। डील के अनुसार, 36 राफेल लड़ाकू विमानों के लिए सौदा किया गया है।

पायलटों का व्यवहारिक प्रशिक्षण शुरू 
विमानों की पहली खेप 2019 में भारत को मिलनी है लेकिन इससे पहले भारतीय वायुसेना के पायलटों को इस लड़ाकू विमान से परिचित कराने के लिए ऑस्ट्रेलिया में युद्घ अभ्यास के बाद तीन राफेल विमान शनिवार को ग्वालियर वायुसेना के हवाई अड्डे पर पहुंचाए गए हैं। रविवार से भारतीय वायुसेना और फ्रांस से आए वायुसेना के पायलटों के बीच व्यवहारिक प्रशिक्षण शुरू हो गया है।

क्यों खास है राफेल 
फ्रांस की डेसाल्ट कंपनी द्वारा निर्मित राफेल लड़ाकू विमान बेहद खास माना जा रहा है। यह हवा से हवा में 150 किलोमीटर तक मारक क्षमता रखता है। इसके अलावा अत्याधुनिक तकनीकों से लैस है। यह मिसाइल से लैस, भारी हमला और परमाणु प्रतिरोध वाला विमान है, जबकि हमारा प्रतिद्वंदी पाकिस्तान अमेरिकी तकनीक से बने एफ-16 विमानों का उपयोग करता है, जिसकी मारक क्षमता 50 किलोमीटर है। उसकी तुलना में हमारी शक्ति तीन गुना बढ़ जाएगी।

 

Posted By: Arun Kumar Singh