नई दिल्ली, प्रेट्र। सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ जज जस्टिस एसए बोबडे के नेतृत्व में देश के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच कमेटी बैठेगी।

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के खिलाफ लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों की आंतरिक जांच के लिए मंगलवार को उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश ( नंबर-2 जज ) न्यायमूर्ति एस.ए. बोबडे को नियुक्त किया गया। संपर्क किए जाने पर न्यायमूर्ति बोबडे ने इस घटनाक्रम की पुष्टि की। वरिष्ठता क्रम के मुताबिक, वह सीजेआइ के बाद वरिष्ठतम न्यायाधीश हैं।

उन्होंने बताया कि नंबर-2 जज होने के नाते प्रधान न्यायाधीश ने उन्हें शीर्ष न्यायालय की एक पूर्व महिला कर्मचारी की ओर से सीजेआइ के खिलाफ लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए नियुक्त किया है।

न्यायमूर्ति बोबडे ने बताया कि उन्होंने शीर्ष न्यायालय के दो न्यायाधीशों-न्यायमूर्ति एनवी रमन और न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी को शामिल कर एक समिति गठित की है। न्यायमूर्ति बोबडे ने कहा, 'मैंने समिति में न्यायमूर्ति रमन को शामिल करने का फैसला किया है, क्योंकि वह वरिष्ठता में मेरे बाद हैं और न्यायमूर्ति बनर्जी को इसलिए शामिल किया गया, क्योंकि वह महिला न्यायाधीश हैं।'

उन्होंने कहा कि कहा कि वह पहले ही लिखित पत्र में जजों पर आरोप लगाने वाली महिला को नोटिस जारी कर चुके हैं। पीड़ित महिला ने हलफनामे में उसका यौन उत्पीड़न होने की बात कही है।

इस मामले की पहली सुनवाई शुक्रवार (26 अप्रैल) को होगी और सर्वोच्च अदालत के महासचिव को भी सभी दस्तावेजों और सामग्री के साथ तैयार रहने को कहा गया है। जस्टिस बोबडे ने कहा कि यह औपचारिक न्यायिक प्रक्रिया नहीं होगी। इसमें आंतरिक जांच होगी जिसमें विभिन्न पक्षों को अपने वकीलों की ओर से प्रतिनिधित्व नहीं देना होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जांच पूरी करने के लिए कोई समय-सीमा तय नहीं की गई है। भविष्य की कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि जांच में क्या बात सामने आती है, लेकिन यह सब गोपनीय रहेगा।

उल्लेखनीय है कि विगत शनिवार को चीफ जस्टिस गोगोई के नेतृत्व में तीन जजों की बेंच ने मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ आरोपों पर सुनवाई की थी। उस दौरान सीजेआइ ने अपने खिलाफ लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों को बेबुनियाद बताया था और इसके पीछे बहुत बड़े षड्यंत्र का अंदेशा जताया था। उन्होंने कहा था कि कोई बहुत बड़ी ताकत सीजेआइ के दफ्तर को निष्क्रिय करना चाहती है। चीफ जस्टिस के अपनी दलीलें देने के बाद अन्य दो जजों जस्टिस अरुण मिश्रा और संजीव खन्ना ने आदेश पारित किया।

हालांकि, मंगलवार को सीजेआइ ने एक नई बेंच बनाई जिसमें जस्टिस मिश्रा, आरएफ नरीमन और दीपक गुप्ता को यौन उत्पीड़न मामले की जांच के लिए रखा गया।

पांच पीठों में एक घंटे देर से शुरू हुई कार्यवाही

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई समेत पांच वरिष्ठ न्यायाधीशों की अध्यक्षता वाली पीठों की कार्यवाही मंगलवार को करीब एक घंटे देर से दिन के 11:30 बजे शुरू हुई। अमूमन पीठों की कार्यवाही 10:30 बजे शुरू हो जाती है।

सुप्रीम कोर्ट के सूचना पट्ट पर यह नोटिस लगा दिया गया था कि कोर्ट संख्या एक से लेकर पांच तक में दिन के 11:30 बजे तक न्यायिक कार्यवाही नहीं होगी। कोर्ट संख्या एक में चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ बैठती है। सूत्रों का कहना है कि वरिष्ठ न्यायाधीश किसी अहम मुद्दे पर बातचीत कर रहे थे।

उल्लेखनीय है कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की सभी 15 पीठों की कार्यवाही 15 मिनट देर से दिन के 10:45 बजे शुरू हुई थी। इससे पहले शनिवार को अपने ऊपर लगे आरोपों के मद्देनजर चीफ जस्टिस की अगुआई में तीन न्यायाधीशों की पीठ ने अप्रत्याशित सुनवाई की थी। चीफ जस्टिस ने उन पर लगे आरोपों को 'अविश्वसनीय' बताते हुए न्यायालय की एक असाधारण सुनवाई संचालित की थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि इसके पीछे एक बड़ा षड्यंत्र है।

 

Posted By: Bhupendra Singh

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