चेन्नई [प्रेट्र]। दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना शुरू करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शांति के नोबेल पुरस्कार के लिए नामित किया गया है। यह नामांकन तमिलनाडु भाजपा की अध्यक्ष तमिलसाई सुंदरराजन की तरफ से किया गया है। राज्य भाजपा की ओर से जारी की गई विज्ञप्ति में कहा गया कि दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना –आयुष्मान भारत की शुरुआत करने के लिए डॉ तमिलिसाई सुंदरराजन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नोबेल शांति पुरस्कार 2019 के लिए नामित किया है। साथ ही उन्होंने लोगों से भी अपील की वे इससे जुड़े।

बता दें कि बीते रविवार को पीएम मोदी ने झारखंड के रांची से ‘प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना –आयुष्मान भारत’ लॉन्च की थी। ये भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है, जिसके तहत गरीबों का अच्छा और मुफ्त इलाज होगा।

हर वर्ष सितंबर में शुरू होती है नामांकन प्रक्रिया 

अगले वर्ष 31 जनवरी तक किसी भी व्यक्ति को इस पुरस्कार के लिए नामांकित किया जा सकता है। हर वर्ष सितंबर महीने से इस पुरस्कार के लिए नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।

राज्य भाजपा कार्यालय द्वारा जारी विज्ञप्ति में बताया गया है कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के पति डॉ. पी सुंदरराजन ने भी मोदी को नोबेल पुरस्कार के लिए नामित किया है। सुंदरराजन एक निजी विश्वविद्यालय में नेफ्रोलॉजी के विभागाध्यक्ष हैं। इसमें कहा गया है कि दूरदृष्टा प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना करोड़ों गरीबों के जीवन को बदलकर रख देगी। इसमें विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों, सांसदों सहित अन्य लोगों से भी पीएम मोदी को नामित करने को कहा गया है।

नोबेल पुरस्कार का इतिहास

नोबेल पुरस्कार नोबेल फाउंडेशन द्वारा स्वीडन के वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेल की याद में दिया जाता है। यह पुरस्‍कार चिकित्‍सा, भौतिकी, रसायन विज्ञान, साहित्‍य और शांति के लिए दिया जाता है। सबसे पहला नोबल 1901 में नोबल की मौत के पांच वर्ष बाद दिया गया था। अल्‍फ्रेड नोबल की स्‍मृति में ही इकोनॉमिक अवॉर्ड बैंक ऑफ स्‍वीडन की ओर से दिया जाता है। इसकी शुरुआत 1968 में हुई थी। वहीं, नोबेल शांति पुरस्कार विश्व स्तर पर शांति के लिए किए गए प्रयासों के लिए दिया जाता है। जिसके लिए पीएम मोदी का नामांकन किया गया है।

नॉर्वे में दिया जाता है नोबेल का शांति पुरस्कार

आपको बता दें कि नोबल का शांति पुरस्‍कार नॉर्वे में दिया जाता है, जबकि शेष सभी पुरस्‍कार स्‍वीडन में दिए जाते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्‍योंकि यह अल्‍फ्रेड नोबल की इच्‍छा थी। हालांकि अल्फ्रेड नोबेल ने कभी इस रहस्य से पर्दा नहीं हटाया कि शांति पुरस्कार प्रदान करने का जिम्मा उन्होंने स्वीडिश संस्था को क्यों नहीं सौंपा। गौरतलब है कि 1905 से पहले तक स्‍वीडन और नॉर्वे एक ही संघ का हिस्‍सा थे, जो बाद में अलग-अलग हो गए थे। अबतक भारत में मदर टेरेसा और कैलाश सत्यार्थी को शांति के लिए नोबेल पुरस्कार मिले हैं। इसके अलावा साहित्य के क्षेत्र में रविंद्र नाथ टैगोर, भौतिकी के क्षेत्र में डॉक्टर सीवी रमन, अर्थशास्त्र में अमर्त्य सेन को भी नोबेल पुरस्कार मिल चुका है।
 

Posted By: Vikas Jangra

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