नई दिल्ली, प्रेट्र/एएनआइ/आइएएनएस। भाजपा सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि आवंटित किए जाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जमीन आवंटन के लिए सुप्रीम कोर्ट की अनुमति की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि जमीन अभी भी भारत सरकार के कब्जे में है।

31 मई को पीएम को लिखे पत्र में उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण के लिए भूमि आवंटित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की अनुमति की जरूरत नहीं है। उनको इस संबंध में दी गई सलाह गलत है। स्वामी ने कहा कि 1993 में तत्कालीन नरसिम्हा राव सरकार ने उस जमीन का राष्ट्रीयकरण कर दिया था और अनुच्छेद 300 के तहत इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट कोई सवाल नहीं उठा सकता है। वह सिर्फ इस संबंध में मुआवजा तय कर सकता है। ऐसे में अभी से निर्माण शुरू करने में सरकार के सामने कोई बाधा नहीं है।

दरअसल, इसी साल जनवरी में मोदी सरकार ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर विवादित क्षेत्र से अलग 67 एकड़ से अधिक जमीन को उसके मूल मालिक राम जन्मभूमि न्यास को सौंपने के बारे में अनुमति मांगी थी।

रामसेतु को मिले राष्ट्रीय धरोहर का दर्जा

पीएम को लिखे चार पन्ने के पत्र में स्वामी ने रामसेतु को प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल तथा अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत राष्ट्रीय पौराणिक स्मारक की मान्यता देने की अपील की है। स्वामी ने लिखा कि जहां तक मुझे पता है कि संस्कृति मंत्रालय से राम सेतु को राष्ट्रीय धरोहर की मान्यता देने की स्वीकृति मिल चुकी है, लेकिन पता नहीं किस कारण से मंत्रिमंडल ने इसे स्वीकृति नहीं प्रदान की है। ऐसे में मेरा आपसे अनुरोध है कि अटार्नी जनरल सुप्रीम कोर्ट में यह बयान दें कि सरकार राम सेतु को एक धरोहर के रूप में मान्यता देने के लिए सहमत है।

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