नई दिल्‍ली, जेएनएन। सुप्रीम कोर्ट में आज मोदी सरकार के एक फैसले पर सुनवाई है। अदालत में आज सामान्य वर्ग के गरीबों को 10 फीसद आरक्षण दिए जाने के मसले पर सुनवाई होगी। बता दें कि भाजपा विरोधी दलों की सरकारों ने इस कानून को पारित नहीं किया है।

सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं लंबित हैं जिनमें सामान्य वर्ग के गरीबों को आर्थिक आधार पर सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में प्रवेश में दस फीसद आरक्षण देने के कानून को चुनौती दी गई है। इससे पहले हुई सुनवाई पर भी कोर्ट ने कानून पर अंतरिम रोक लगाने की मांग ठुकरा दी थी। सभी याचिकाएं न्यायमूर्ति एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने सुनवाई के लिए लगी थीं।

दस फीसद आरक्षण का किया विरोध

एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने कहा कि यह मामला पांच न्यायाधीशों की संविधानपीठ को सुनवाई के लिए भेजा जाना चाहिए। आर्थिक आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता। उन्होंने इंद्रा साहनी मामले में सुप्रीम कोर्ट के नौ जजों के फैसले का उदाहरण दिया।

केन्द्र ने दस फीसद आरक्षण को सही ठहराया

केन्द्र सरकार पहले ही इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल कर कानून को सही ठहरा चुकी है। सरकार का कहना है कि न तो यह कानून संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन करता है और न ही यह सुप्रीम कोर्ट के इंद्रा साहनी मामले में दिए गए फैसले के खिलाफ है। सरकार का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 10 फीसद आरक्षण राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद कानून बन चुका है। यह कानून गरीबों के हक मे है। इससे कमजोर वर्ग को सरकारी नौकरी और शिक्षण संस्थानों में प्रवेश में बराबरी का मौका मिलेगा।

Posted By: Tilak Raj

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