भोपाल, जेएनएन। पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं मध्य प्रदेश कांग्रेस के कद्दावर नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के राजनीतिक भविष्य को लेकर उनके समर्थकों की नाराजगी बढ़ती जा रही है। समर्थकों का दबाव है कि सिंधिया को प्रदेश कांग्रेस संगठन की कमान सौंपी जाए, लेकिन राज्य कांग्रेस के अन्य क्षत्रप उनकी राह में रोड़ा बने हुए हैं।

समर्थकों में नाराजगी 

सिंधिया के ही प्रभाव वाले जिले दतिया के कार्यकारी अध्यक्ष अशोक दांगी बगदा ने तो सिंधिया के समर्थन में इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कांग्रेस आलाकमान को चेतावनी दी है कि यदि अगले दस दिन में सिंधिया को अध्यक्ष नहीं बनाया गया तो 500 समर्थक इस्तीफा दे देंगे। जबलपुर में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को सड़क पर उतरकर सिंधिया के पक्ष में प्रदर्शन किया।

अफवाहों पर पहली बार बोले ज्योतिरादित्य

पिछले हफ्ते दस दिन से सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों पर इस बीच पहली बार मुंह खोलते हुए सिंधिया ने साफ किया कि वे न तो भाजपा में जा रहे हैं और न ही भाजपा के किसी भी नेता के संपर्क में हैं। सिंधिया ने साध्वी प्रज्ञा ठाकुर द्वारा दिए बयान की आड़ में भाजपा पर करारा हमला भी किया।

क्‍या होगी भूमिका...

ज्योतिरादित्य सिंधिया की कांग्रेस में आखिर भूमिका क्या होगी? यह सवाल सिंधिया समर्थकों को परेशान कर रहा है। लोकसभा चुनाव से पहले जब प्रदेश अध्यक्ष का माहौल बना, तब उन्हें मध्य प्रदेश से हटाकर आधे उत्तर प्रदेश का प्रभारी बना दिया। समर्थकों का मानना है कि यदि सिंधिया राज्य में ही सक्रिय रहते तो न केवल खुद की, बल्कि आसपास की एक-दो सीटें और निकाल सकते थे। 

समर्थकों को रास नहीं आई ये बात 

अब जबकि राज्य में नए प्रदेश अध्यक्ष के चयन का वक्त आया तो उन्हें महाराष्ट्र विधानसभा के लिए बनी स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाकर महाराष्ट्र में उलझा दिया। यह बात भी समर्थकों को रास नहीं आई। सिंधिया समर्थक मंत्री इमरती देवी तो खुलकर मैदान में आ चुकी हैं। उनका कहना है कि सिंधिया को मप्र में ही कोई जिम्मेदारी दी जानी थी, महाराष्ट्र में कौन पूछ रहा है। वहीं जिला कांग्रेस कमेटी मुरैना के अध्यक्ष राकेश मावई ने एलान किया है कि अगर सिंधिया अध्यक्ष नहीं बने तो मुरैना की कार्यकारिणी सहित वे खुद भी इस्तीफा दे देंगे। यह मांग मावई ने सीधे सोनिया गांधी और राहुल गांधी से की है। 

कमाल करेगी सीएम और अध्यक्ष की जोड़ी 

राकेश मावई ने बताया कि विधानसभा चुनाव जिताने में ज्योतिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ का योगदान रहा है। ग्वालियर चंबल की 34 सीटों में से 27 सीटें यहां की जनता ने इसलिए जिताई थीं, क्योंकि जनता चाहती थी कि सिंधिया सीएम बनें। मावई ने कहा कि अगर सिंधिया को लोकसभा चुनाव से पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बना दिया जाता तो इसका लाभ पार्टी को मिलता। उन्होंने कहा कि अगर अब भी सिंधिया को अध्यक्ष बनाया जाता है तो इसका लाभ नगरीय निकाय चुनावों में मिलेगा। सीएम और अध्यक्ष की जोड़ी फिर कमाल करेगी।

सिंधिया ने भाजपा पर बोला हमला

ज्योतिरादित्य सिंधिया सोमवार को उज्जैन में थे। वहां उन्होंने पहली बार खुद को लेकर चल रही अफवाहों पर मुंह खोला। सिंधिया को लेकर सोशल मीडिया पर यह चर्चा सरगर्म थी कि वे कांग्रेस से नाराज हैं और भाजपा नेताओं के संपर्क में हैं। सिंधिया ने इस बात का खंडन किया। उन्होंने भोपाल की सांसद प्रज्ञा ठाकुर के बयान को लेकर भाजपा पर हमला भी बोला। सिंधिया ने कहा कि मुझे बड़ा अफसोस है कि एक जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति ने ऐसा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा को ऐसे व्यक्ति को पार्टी में शामिल करने और टिकट देने पर अपने गिरेबां में झांकना चाहिए।

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Posted By: Monika Minal

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