नई दिल्ली, जेएनएन। आखिरकार 23 साल पुराने गेस्ट हाउस कांड को भुलाकर लोकसभा चुनाव में भाजपा का विजय रथ रोकने के लिए बसपा-सपा अपनी पुरानी दुश्मनी भूल गए। बसपा सुप्रीमो मायावती गेस्ट हाउस कांड के जख्म को भूलाकर समाजवादी पार्टी से हाथ मिला लिया, इस गठबंधन पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी आ रही है। जहां भाजपा ने सपा-बसपा गठबंधन को निशाने पर लिया, वहीं कई अन्य दल इसका स्वागत भी कर रहे हैं।

कौन-कितने पर पड़ेगा

लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस ने मायावती और अखिलेश ने ऐलान किया कि लोकसभा चुनाव में सपा और बसपा 38-38 सीटों पर लड़ेंगी। दोनों दलों ने चार सीटें छोड़ दी हैं, जिसमें दो सीटें सहयोगियों के खाते में जाएगी। वहीं, दो सीटें कांग्रेस के लिए छोड़ दी गई हैं, अमेठी और रायबरेली है।

मायावती-अखिलेश के साथ पर किसने क्या कहा?

सपा-बसपा गठबंधन पर आरजेडी नेता और बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा, ' भाजपा की हार की शुरुआत उत्तर प्रदेश और बिहार से हो चुकी है।'

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा, 'कांग्रेस का शहजादा हो, बंगाल की दीदी हों, आंध्र प्रदेश के बाबू हों, यूपी की बहनजी हों...सब दिल में इच्छा रखते हैं और सबकी तलवारें चुनाव के बाद निकलेंगी।'

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा, 'आज पूरे देश में गठबंधन की आवश्यकता है। 2014 में भाजपा को केवल 31% वोट मिले थे और दावा किया था कि यह लोगों का जनादेश है, यह वोटों में विभाजन के कारण हुआ।'

वहीं, इसपर भाजपा नेता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, 'दोनों दल सिर्फ अपनी राजनीतिक जमीन बचाने के लिए एक साथ चुनाव लड़ रहे हैं। वैसे भी, यह उनकी पसंद है। हम आश्वस्त हैं। अगर सभी पार्टियां एक साथ आती हैं, तब भी हम जीतेंगे।'

Posted By: Nancy Bajpai