सिद्धार्थनगर, ब्रजेश पांडेय। Coronavirus in nepal: नेपाल ने देश में कोरोना पॉजिटिव की लगातार बढ़ रही संख्या को देखते हुए कपिलवस्तु जनपद में कर्फ्यू लगा दिया है। अकेले कपिलवस्तु में 21 लोग संक्रमित हो चुके हैं। नेपाल ने भारत के बढ़नी से लगने वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा अब 31 मई तक सील कर दी है। नेपाल में अब तक 357 कोरोना पॉजिटिव मिले हैं। इसमें 36 ठीक होकर अपने घर जा चुके हैं। एक महिला समेत दो लोगों की मौत हो चुकी है।

नेपाल के स्वास्थ्य एवं जनसंख्या मंत्रालय के सह प्रवक्ता डॉ. समीर कुमार अधिकारी के अनुसार काठमांडू से सटे सिन्धुपाल्चोक जिले की एक महिला और बांके जिला के एक युवक की मौत हो चुकी है। कपिलवस्तु के प्रमुख जिलाधिकारी दीर्घ नारयण पौडेल ने बताया कि भारत के सिद्धार्थनगर से सटे कपिलवस्तु जिले की दांग, प्यूठान, रुपन्देही की अंतरिम सीमा भी सील कर दी गई है।

नेपाल के 106 लोग सिद्धार्थनगर में क्वारंटाइन

सिद्धार्थनगर जनपद के विभिन्न चार स्थानों पर नेपाल के कुल 106 लोग  क्वारंटाइन किए गए हैं। 40 लोगों को आश्रम पद्धति स्कूल में रखा गया है। 25 लोग बढ़नी तो अन्य दो स्कूलों में हैं। सीमा सील होने के कारण नेपाली नागरिकों के स्वदेश लौटने के लिए अभी इंतजार करना पड़ेगा।

नेपाल को बड़ा झटका: सांसद अभिषेक शाह

कपिलवस्तु के सांसद अभिषेक प्रताप शाह का कहना है कि भूकंप के बाद नेपाल में यह दूसरी सबसे बड़ी विपदा है। इससे नेपाल को अरबों रुपये का नुकसान हुआ है। कोरोना संकट गहराने से पर्यटन उद्योग को बड़ा झटका लगा है। काठमांडू, पोखरा, चितवन, लुम्बिनी समेत नेपाल के पर्यटक  स्थल सूने पड़े हैं। सत्तर फीसद आर्थिक स्रोत का जरिया होटल और पर्यटन उद्योग है।

कुवैत में फंसे इंजीनियर की वापसी के लिए पत्नी की गुहार

उधर, देवरिया के बनकटा थाना के गाढ़ा कानूनगोई गांव निवासी तेज बहादुर सिन्हा कुवैत में फंसे हैं। वह एक कंपनी में इंजीनियर हैं। उनकी वीजा की अवधि 30 मई को समाप्त हो रही है। उनकी पत्नी स्वाति सिन्हा ने डीएम को पत्र लिखकर पति के स्वदेश वापसी की गुहार लगाई है। इस गांव के वीरेंद्र बहादुर सिन्हा के तीनों पुत्र अमरेश बहादुर सिन्हा, श्याम बहादुर सिन्हा व तेज बहादुर  इंजीनियर हैं। अमरेश बहादुर सिन्हा दुबई की किसी कंपनी में तो श्याम बहादुर शक्ति नगर में इंजीनियर हैं। तेज बहादुर कुवैत में हैं। उनकी पत्नी स्वाति सिन्हा घर पर रहती हैं। ब'चे पटना में पढ़ाई करते हैं। लॉकडाउन में बच्चे भी घर आ गए हैं। बुजुर्ग पिता वीरेंद्र बहादुर कहते है कि मेरे पुत्र ने भारतीय दूतावास में गुहार लगाई,  लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। तेज बहादुर की पत्नी का कहना है कि उनके पति वहां काफी तनाव में हैं। कंपनी में काम नहीं है। 

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