जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली।1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इन दंगों से जुड़े बंद मामलों की फिर से जांच के लिए बनी एसआइटी ने सात मामलों की दोबारा जांच शुरू कर दी है। इन सभी मामलों में आरोपितों को बरी कर दिया गया है या अदालत में सुनवाई बंद हो चुकी है। वैसे तो इन सातों केस से जुड़ी एफआइआर में सीधे तौर पर कमलनाथ का नाम नहीं है, लेकिन भाजपा विधायक और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा का दावा है कि इनमें से गुरुद्वारा रकाबगंज दंगे से जुड़े एक केस में कमलनाथ ने आरोपितों को शरण दी थी और इसके लिए दो चश्मदीद गवाही देने को तैयार हैं।

एसआइटी ने जिन सात मामलों की जांच का फैसला किया है, वे दिल्ली के थाना क्षेत्र वसंत विहार (दंगा स्थल मुनरिका), थाना क्षेत्र सनलाइट कालोनी (दंगा स्थल भगवान नगर), कल्याणपुरी, संसद मार्ग (दंगास्थल गुरुद्वारा रकाबगंज), कनॉट प्लेस, थाना क्षेत्र पटेल नगर (दंगास्थल आनंद पर्बत क्षेत्र) और शाहदरा थाना क्षेत्र (दंगास्थल बाबरपुर रोड और लोनी रोड) से जुड़े हैं। एसआइटी ने सार्वजनिक सूचना जारी कर आम जनता से इन केस से संबंधित जानकारी देने को कहा है।

इसके अनुसार कोई व्यक्ति, समूह, संस्था या संगठन इन केस से जुड़ी कोई भी जानकारी एसआइटी से साझा कर सकता है। इसके लिए एसआइटी के पुलिस स्टेशन में केस की जांच के प्रभारी अधिकारी से संपर्क करना होगा। दरअसल, 9 अप्रैल को गृहमंत्रालय ने एसआइटी को लिखा था कि ऐसे सभी गंभीर मामले जिसमें आरोपित बरी हो गए हैं, उसकी फिर से जांच शुरू की जाए। इसके बाद 19 अगस्त को इन मामलों से जुड़े तथ्यों को गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर डालने का निर्देश दिया था ताकि देश और दुनिया में सभी को इसकी जानकारी हो। जिसके पास भी कोई सुबूत हो वह उसे एसआइटी के सामने पेश कर सके।

माथुर कमेटी ने की थी सिफारिश
मोदी सरकार ने 2014 में सेवानिवृत जस्टिस जीपी माथुर की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया था। अपनी रिपोर्ट में जस्टिस जीपी माथुर कमेटी ने एसआइटी का गठन कर बंद मामलों की दोबारा जांच की सिफारिश की थी। इसके बाद 12 फरवरी 2015 को दो आरक्षी निरीक्षक और एक न्यायिक अधिकारी वाले एसआइटी का गठन किया गया।

650 में से 80 मामलों की पड़ताल
साढे़ चार साल में एसआइटी ने सिख दंगे से जुड़े कुल 650 मामलों में से 80 की गहन छानबीन की है। इनमें से सात मामलों की जांच शुरू करने का फैसला लिया गया। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कई राज्यों में भड़के सिख विरोधी दंगों में 3325 लोग मारे गए थे। इनमें से 2733 लोग सिर्फ दिल्ली में मारे गए थे। दिल्ली पुलिस ने सुबूतों के अभाव में 241 केस बंद कर दिए थे। बाद में सीबीआइ ने चार केस की दोबारा जांच शुरू की। इनमें से केवल दो केस में आरोपपत्र दाखिल किया गया। इन्हीं में से एक मामले में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।

फिर से जांच का स्वागत करता हूं
भाजपा विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि वह एसआइटी के सिख विरोधी दंगों की दोबारा जांच करने का स्वागत करते हैं। उन्होंने इस मुद्दे पर कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से कमलनाथ का इस्तीफा लेने की मांग की है। सिरसा ने सोमवार को बताया कि एसआइटी ने संसद मार्ग थाने में दर्ज 601/84 की जांच शुरू कर दी है। यह मामला उन दो गवाहों के आधार पर है जिन्होंने नानावती कमीशन के सामने बयान देकर 1984 सिख विरोधी दंगे में कमलनाथ और वसंत साठे की भूमिका की बात कही थी। इसमें कमलनाथ पर आरोप है कि उन्होंने गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब में भीड़ को हिदायत देकर दंगे को अंजाम दिलवाया। 

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Posted By: Sanjeev Tiwari

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