माला दीक्षित, नई दिल्ली। पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के राज्यसभा में मनोनयन और शपथ ग्रहण के वक्त हुआ विवाद अभी थमने वाला नहीं है। बल्कि अब गोगोई की ओर से पलटवार होने वाला है और उसमे राजनीति गरमाने वाली है। मीडिया से बातचीत में गोगोई ने साफ संकेत दे दिया है कि उन पर सवाल उठाने वाले न्यायाधीशों और राजनीतिज्ञों को भी कई जवाब देने होंगे।

राज्यसभा सदस्य मनोनीत होने के बाद जब जस्टिस गोगोई ने सदस्यता की शपथ ली तो विरोध में नारे लगाने के साथ साथ कांग्रेस सहित ज्यादातर विपक्ष सदन से वाकआउट कर गया था। उस वक्त को गोगोई सिर्फ इतना कहकर चुप हो गए कि वह बताएंगे कि सदस्यता क्यों स्वीकार की। लेकिन अब परत दिखने लगी है। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और जानेमाने वकील कपिल सिब्बल ने जस्टिस गोगोई को इंगित कर अपने ट्वीटर हैंडल पर पांच सवाल पूछे थे।

कपिल सिब्बल ने इलेक्टोरल बांड का भी उठाया मुद्दा

सवाल थे कि क्यों आपने अपने ही केस की सुनवाई की, इशारा यौन उत्पीड़न मामले की सुनवाई की ओर था। दूसरा प्रश्न राफेल मामले में सीलबंद लिफाफे में दस्तावेज स्वीकारने से संबंधित था कि, इलेक्टोरल बांड का मुद्दा, राफेल मामले में सरकार को क्लीन चिट देने और सीबीआइ निदेशक को हटाने के मामले से संबंधित थे।

गोगोई ने कपिल सिब्बल पर किया चौकाने वाला खुलासा

जस्टिस गोगोई ने चैनलों से बातचीत में सिब्बल के सवालों का भी जवाब दिया। सिब्बल और गोगोई दोनों राज्यसभा सांसद हैं। एक चैनल में जस्टिस गोगोई ने कपिल सिब्बल पर आरोप लगाते हुए चौकाने वाला खुलासा किया और यहां तक कह दिया कि प्रेस कान्फ्रेंस (तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा के कार्य आवंटन पर सवाल उठाने वाली सुप्रीम कोर्ट के चार जजों की ऐतिहासिक प्रेस कान्फ्रेंस जिसमें जस्टिस गोगोई भी शामिल थे) के बाद सिब्बल जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग पर मेरा समर्थन चाहते थे और इसके लिए मेरे घर आना चाहते थे लेकिन मैने उन्हें अपने घर नहीं आने दिया।

सवाल उठा रहे पूर्व न्यायाधीशों पर साधा निशाना 

गोगोई ने उनकी नियुक्ति पर सवाल उठा रहे पूर्व न्यायाधीशों पर निशाना दागा। जस्टिस एपी शाह के बारे में तो यहां तक कहा कि तीन वजहें थी जिसकी वजह से उन्हें सुप्रीम कोर्ट जज प्रोन्नत नहीं किया गया। और उन तीन में से एक वजह करोड़ों रुपये की प्रापर्टी के सौदे से भी जुड़ा मामला भी था जो 2008 में सुप्रीम कोर्ट आया था। गोगोई ने कहा कि ये मैटर आफ रिकार्ड है और आरटीआई डाल कर उसके बारे में जाना जा सकता है।

पांच न्यायाधीशों का सर्वसम्मति का फैसला

रामजन्मभूमि केस की लगातार लंबी सुनवाई कर अपने कार्यकाल में जल्दी निपटारा करने के आरोपों पर जस्टिस गोगोई ने कहा कि अगर किसी मामले की जल्दी सुनवाई नहीं की जाती तो उसकी आलोचना होती है और अगर जल्दी सुनवाई कर निपटाया जाता है तो उसकी भी आलोचना होती है। आखिर चीफ जस्टिस क्या करे। लंबे समय से मामला लंबित था उसे निपटाया जाना चाहिए था। वह फैसला उनका अकेले का नहीं था पांच न्यायाधीशों का सर्वसम्मति का फैसला था।

राफेल फैसला भी तीन न्यायाधीशों का था। राफेल मामले में सील बंद लिफाफे के दस्तावेज स्वीकारे जाने के बारे में गोगोई ने कहा कि सील बंद लिफाफे की प्रक्रिया टूजी मामले में भी अपनाई गई थी और अभी हाल में शाहीनबाग मामले में भी वकील संजय हेगड़े ने सीलबंद लिफाफे में अपनी रिपोर्ट कोर्ट में जमा की है जिसे कोर्ट ने स्वीकार किया है, उस पर सिब्बल ने सवाल नहीं उठाए। गोगोई ने कहा कि राफेल मामले में सील कवर में राफेल की कीमत एयरक्राफ्ट पर लगे उपकरणों की कीमत आदि थी स्पष्ट है कि जब गोगोई संसद में बोलेंगे तो कई परतें खुल सकती हैं।

Posted By: Dhyanendra Singh

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