संजय मिश्र, नई दिल्ली। कर्नाटक में पार्टी के पुराने दिग्गजों के एतराज के बाद भी कांग्रेस हाईकमान के लिए पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को नजरअंदाज करना मुश्किल हो रहा है। सूबे में पार्टी का सियासी प्रभाव कायम रखने के लिए हाईकमान को सिद्धारमैया से बेहतर कोई दूसरा विकल्प नजर नहीं आ रहा है। इसीलिए कांग्रेस नेतृत्व ने सिद्धारमैया को कर्नाटक में विपक्ष का नेता बनाने का मन लगभग बना लिया है।

सिद्धारमैया कर्नाटक कांग्रेस के प्रभावशाली नेता

पार्टी सूत्रों के अनुसार गुटों में बंटी कर्नाटक कांग्रेस के तमाम नेताओं से विचार-विमर्श और जमीनी फीड बैक लेने के बाद हाईकमान का साफ आकलन है कि भाजपा की आक्रामक सियासत और मुख्यमंत्री येदियुरप्पा से मुकाबले के लिए सिद्धारमैया से ज्यादा प्रभावी पार्टी का कोई दूसरा नेता नहीं है। हालांकि मल्लिकार्जुन खड़गे, वीरप्पा मोइली के अलावा पूर्व डिप्टी सीएम जी परमेश्वरन ही नहीं गांधी परिवार के निकट माने जाने मुनियप्पा जैसे वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया को प्रदेश कांग्रेस का नेतृत्व एक बार फिर सौंपे जाने पर एतराज जता रहे हैं।

सिद्धारमैया को नेता विपक्ष बनाने का विरोध

सिद्धारमैया को कांग्रेस विधायक दल का नेता बनाकर नेता विपक्ष बनाने की पहल का विरोध कर रहे इन नेताओं का तर्क है कि पूर्व मुख्यमंत्री ने बीते करीब दस साल से कर्नाटक कांग्रेस को अपने हिसाब से चलाया। पिछले विधानसभा में हाईकमान ने उन्हें खुली छूट दी मगर वे सूबे में पार्टी की सत्ता बचाने में नाकाम रहे। इतना ही नहीं कांग्रेस-जदयू की गठबंधन सरकार को बचाने में भी वे कामयाब नहीं रहे और उनके कुछ खास समर्थक कांग्रेस विधायकों ने ही पाला बदल सरकार गिरवाई।

सिद्धारमैया ने कांग्रेस को नुकसान पहुंचाया

सूत्रों ने बताया कि सूबे के नेताओं के इस एतराज को देखते हुए ही हाईकमान ने वरिष्ठ नेता मधुसूदन मिस्त्री को कांग्रेस के सभी गुटों के साथ बातचीत करने का जिम्मा सौंपा था। सिद्धारमैया के विरोधी नेताओ ने इस मशविरे के दौरान साफ कहा कि पूर्व सीएम ने अपनी मनमानी के जरिये पार्टी का नुकसान किया है और अपने समर्थक नेताओं के अलावा वे किसी की सुनते ही नहीं।

सामाजिक समीकरणों पर सिद्धारमैया फिट

हालांकि सूबे के नेताओं के एतराज के बावजूद कांग्रेस का सियासी आकलन है कि राजनीतिक चेहरे के लिहाज से ही नहीं सूबे के सामाजिक समीकरणों के हिसाब से भी सिद्धारमैया पार्टी की जरूरत हैं। सूबे के दूसरे सबसे प्रभावशाली कुरूवा समुदाय से आने वाले सिद्धारमैया के कारण यह वर्ग कांग्रेस के साथ जुड़ा है।

सिद्धारमैया हैं हाईकमान की पहली पसंद

शीर्ष नेतृत्व का यह भी मानना है कि सूबे के उसके सबसे जुझारू नेता डीके शिवकुमार इस समय केंद्र की भाजपा सरकार के निशाने पर हैं तब कर्नाटक में आमने-सामने की टक्कर देने वाले नेता की अभी कहीं ज्यादा जरूरत है। इसीलिए तय माना जा रहा कि पार्टी नेताओं के अंदरूनी विरोध के बावजूद हाईकमान सिद्धारमैया को कर्नाटक में विपक्ष का नेता बनाने की घोषणा जल्द ही कर देगा।

Posted By: Bhupendra Singh

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