नई दिल्ली, पीटीआइ। राष्ट्रपति चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार को समर्थन देना, एनसीपी प्रमुख शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले के खिलाफ अपने उम्मीदवार को मैदान में नहीं उतारने से लेकर वैचारिक रूप से अलग मुस्लिम लीग के साथ गठबंधन तक शिवसेना का दोस्तों के साथ दगाबाजी का इतिहास रहा है।

अपने फायरब्रांड हिंदुत्व रुख के लिए जानी जाने वाली शिवसेना का सोमवार को एनडीए को छोड़ कर कांग्रेस और एनसीपी से सरकार बनाने के लिए समर्थन मांगने पर आश्चर्य की बात नहीं है।

पिछले महीने हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में भाजपा ने 288 सीटों में से 105 सीटें जीतीं, शिवसेना 56, एनसीपी 54 और कांग्रेस को 48 सीटे मिली।

कांग्रेस के साथ कई बार गठबंधन

बाल ठाकरे द्वारा 1966 में स्थापित शिवसेना ने अपनी पांच दशक से अधिक लंबी यात्रा में औपचारिक और अनौपचारिक रूप से कांग्रेस के साथ कई बार गठबंधन किया। अपने शुरुआती दिनों में शिवसेना को कई कांग्रेस नेताओं द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन प्राप्त था।

शिवसेना की रैली में कांग्रेस नेता

प्रसिद्ध राजनीतिक विश्लेषक सुहास पलशीकर ने अपने लेख में लिखा है कि राज्य के वरिष्ठ कांग्रेस नेता रामराव अदिक शिवसेना की पहली रैली में उपस्थित थे।

कांग्रेस ने किया इस्तेमाल

वहीं, 'द कजन्स ठाकरे: उद्धव- राज एंड द शैडो ऑफ देअर सेना' के लेखक धवल कुलकर्णी ने कहा कि 1960 और 70 के दशक में पार्टी का इस्तेमाल ज्यादातर कांग्रेस द्वारा मजदूर संघों में वाम दलों के प्रभाव का मुकाबला करने के लिए किया गया था।

कांग्रेस (ओ) के साथ गठबंधन 

1971 में शिवसेना ने कांग्रेस (ओ) के साथ गठबंधन किया और मुंबई और कोंकण क्षेत्र में लोकसभा के लिए तीन उम्मीदवार उतारे। पार्टी ने 1977 में आपातकाल का समर्थन किया और उस वर्ष हुए लोकसभा चुनाव के लिए कोई उम्मीदवार नहीं उतारा।

वसंतराव नाइक की सेना 'वसंतसेना'

कुलकर्णी ने कहा, '1977 में पार्टी ने मेयर चुनाव में कांग्रेस के मुरली देवड़ा का समर्थन किया।' इतना ही नहीं शिवसेना को 1963 से 1974 तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे तत्कालीन वसंतराव नाइक की सेना 'वसंतसेना' कहा जाने लगा।

इंदिरा विरोधी लहर में हारे 33 उम्मीदवार 

सुहास पलशीकर लिखते हैं कि 1978 में जब जनता पार्टी के साथ गठबंधन का प्रयास विफल हो गया, तब शिवसेना ने कांग्रेस (आई) के साथ गठबंधन किया, जो कि इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाला गुट था। शिवसेना ने विधानसभा चुनाव के लिए 33 उम्मीदवारों को मैदान में उतारा, लेकिन इंदिरा विरोधी लहर में सभी 33 को हार का सामना करना पड़ा।

मुस्लिम लीग के साथ गठबंधन

शिवसेना का सबसे अप्रत्याशित गठबंधनों में से एक था मुस्लिम लीग के साथ गठबंधन करना। वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश अकोलकर ने शिवसेना पर अपनी पुस्तक 'जय महाराष्ट्र' में लिखा है कि 1970 के दशक में मुंबई मेयर चुनाव जीतने के लिए शिवसेना ने मुस्लिम लीग के साथ भी गठबंधन किया। इसके लिए दक्षिण मुंबई के नागपाड़ा में शिवसेना सुप्रीमो ने मुस्लिम लीग के नेता जी. एम बनतवाला के साथ मंच भी साझा किया।

Posted By: Manish Pandey

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