नई दिल्ली, जेएनएन। सोनिया गांधी के संसदीय दल का नेता चुने जाने के बाद लोकसभा में कांग्रेस के नेता पद की सरगर्मी तेज हो गई है। चुनाव में तमाम दिग्गजों की शिकस्त को देखते हुए शशि थरूर लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। थरूर के अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी को भी इस रेस से बाहर नहीं माना जा रहा। वहीं कांग्रेस ने नेता चयन से पहले ही साफ कर दिया है कि लोकसभा में जरूरी संख्या नहीं होने के मद्देनजर पार्टी विपक्ष के नेता पद का दावा नहीं करेगी।

कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रमुख रणदीप सुरजेवाला ने विपक्ष का दर्जा दिए जाने के सवाल पर कहा कि इसके लिए लोकसभा में 54 सांसदों की संख्या की जरूरत है और हमारे पास दो सांसद कम हैं। इसीलिए हम विपक्ष के नेता पद पर दावा नहीं कर सकते मगर यह सरकार को तय करना है। सुरजेवाला ने कहा कि संख्या बल सच्चाई है और कांग्रेस इसीलिए न दावा जताएगी, न ही आग्रह करेगी। संसदीय नियमों और परंपराओं के हिसाब से सरकार को फैसला करना है कि उसे आधिकारिक विपक्ष की मान्यता देनी है या नहीं।

लोकसभा में कांग्रेस को विपक्ष का दर्जा मिलता है तो पार्टी संसदीय दल का नेता ही विपक्ष का नेता होगा। लोकसभा में पार्टी नेता कौन होगा इस पर सुरजेवाला ने कहा कि कांग्रेस संविधान के अनुसार संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी अब दोनों सदनों में नेता तय करने के लिए अधिकृत हैं।

सोनिया ने नेता चुने जाने के बाद शनिवार को वरिष्ठ पार्टी नेताओं के साथ लोकसभा में पार्टी का नेता तय करने को लेकर बैठक की। हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी कोई नाम सामने नहीं आया है। मगर पार्टी सूत्रों का कहना है कि लोकसभा में विपक्ष की मुखर भूमिका निभाने के लिए सदन में पार्टी नेता का हिन्दी भाषी होना भी अहम बन गया है। हिन्दी भाषी प्रदेशों से कांग्रेस के महज आधा दर्जन सांसद ही जीते हैं और इसके अलावा पंजाब से आठ सांसद हैं जिनमें मनीष तिवारी भी शामिल हैं। इसीलिए कूटनीति और राजनीति के अनुभव के साथ अपने प्रभावी भाषण के लिए चर्चित शशि थरूर के साथ मनीष तिवारी को भी इस रेस में गिना जा रहा है।

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Posted By: Dhyanendra Singh

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