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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 11, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Sedition Law: सुप्रीम कोर्ट के देशद्रोह के आदेश के बाद मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा -हम अदालत और उसकी स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं

By Babli KumariEdited By:
Published: Wed, 11 May 2022 02:36 PM (IST)Updated: Wed, 11 May 2022 02:40 PM (IST)

राजद्रोह कानून पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए किरेन रिजिजू ने कहा कि एक लक्ष्मण रेखा ...और पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट के देशद्रोह के आदेश के बाद मंत्री किरेन रिजिजू
सुप्रीम कोर्ट के देशद्रोह के आदेश के बाद मंत्री किरेन रिजिजू

नई दिल्ली, एएनआइ। सुप्रीम कोर्ट ने समीक्षा तक राजद्रोह कानून पर रोक लगाई है। राजद्रोह कानून पर कोर्ट की रोक के बाद केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू (Union Law Minister, Kiren Rijiju) ने कहा हमने अपनी बातों को स्पष्ट कर दिया है और कोर्ट के सामने प्रधानमंत्री का इरादा भी बताया है। अब इसके बाद क्या होता है ये मुझे नहीं पता लेकिन मैं ये कहना चाहता हूं कि हमें कोर्ट का सम्मान करना चाहिए।

केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कहा 'हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हम भारतीय संविधान के प्रावधानों के साथ-साथ मौजूदा कानूनों का भी सम्मान करें। 

देशद्रोह के मामलों में सभी कार्यवाही पर रोक लगाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को कहा कि सरकार ने अपनी स्थिति बहुत स्पष्ट कर दी है, उन्होंने कहा कि एक 'लक्ष्मण रेखा' है जिसे राज्य के सभी अंगों द्वारा सम्मान की आवश्यकता है।

रिजिजू ने कहा, 'हम एक-दूसरे का सम्मान करते हैं, अदालत को सरकार, विधायिका का सम्मान करना चाहिए, इसलिए सरकार को भी अदालत का सम्मान करना चाहिए। लक्ष्मण रेखा को किसी के द्वारा पार नहीं किया जाना चाहिए।'

रिजिजू ने कहा कि उन्हें लगता है कि यह सरकार द्वारा उठाया गया एक साहसिक कदम है और उनका मानना ​​है कि कानून बनाना सरकार की जिम्मेदारी है।

आपको बता दें कि सोमवार को, सरकार ने यू-टर्न लेते हुए कहा कि उन्होंने  देशद्रोह कानून की समीक्षा करने का फैसला किया है और सुप्रीम कोर्ट से और समय का अनुरोध किया है, जो कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। अब जुलाई में, देशद्रोह कानून की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर बेंच सुनवाई करेगी।