नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। भारत और सउदी अरब के रिश्तों की तासीर पूरी तरह से बदल चुकी है। इसका एक बड़ा उदाहरण अगले हफ्ते देखने को मिलेगा जब पीएम नरेंद्र मोदी सउदी अरब की यात्रा पर जाएंगे। वैसे इस यात्रा में आर्थिक सहयोग को लेकर कई बड़ी घोषणाएं होने की उम्मीद है लेकिन सबसे अहम बिंदु होगा दोनो देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी काउंसिल को लेकर ऐलान करना। इस काउंसिल के तहत दो अलग अलग प्रमुख समितियां होंगी। एक समिति में दोनो देशों के विदेश व रक्षा मंत्री होंगे जबकि दूसरी समिति में वाणिज्य व वित्त मंत्री होंगे। इन दोनो समितियों के तहत भी कई तरह की उप समितियां होंगी जो दोनो देशों के भावी रिश्तों को तय करने पर समय समय पर अहम सुझाव देंगी। सउदी अरब इस तरह का समझौता सिर्फ आठ देशों के साथ कर रहा है।

पीएम मोदी की इस यात्रा के बारे में जानकारी देते हुए विदेश मंत्रालय में सचिव (आर्थिक मामले) टी एस त्रिमूर्ति ने बताया कि सउदी अरब ने जिन भारत, ब्रिटेन, यूएसए, चीन, फ्रांस, जर्मनी, कोरिया और जापान के साथ रणनीतिक साझेदारी काउंसिल स्थापित करने का फैसला किया है। भारत व सउदी अरब के बीच गठित होने वाले परिषद की अध्यक्षता पीएम नरेंद्र मोदी और सउदी क्राउन प्रिंस सलमान करेंगे। पीएम अपनी इस आधिकारिक यात्रा के दौरान रियाद में निवेश व कारोबार पर आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन एफआइआइ में मुख्य वक्ता के तौर पर भाषण देंगे।

इस सम्मेलन को पूर्व के दाओस के दौरान पर जाना जाता है। दाओस स्विट्जरलैंड का एक शहर है जहां व‌र्ल्ड इकोनोमिक फोरम की तरफ से दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित निवेश सम्मेलन का आयोजन होता है। यह पूछे जाने पर कि क्या मोदी और क्राउन प्रिंस सलमान के बीच होने वाली द्विपक्षीय वार्ता में कश्मीर का मुद्दा उठेगा तो त्रिमूर्ति का जवाब था कि, ''दोनो नेताओं के बीच क्या बात होती है उसके बारे में मैं कुछ नहीं कह सकता लेकिन भारत को यह पता है कि कश्मीर मुद्दे पर सउदी अरब हमारे पक्ष को बखूबी समझता है। वैसे भी फरवरी, 2019 में सउदी क्राउन प्रिंस के भारत आने के बाद रिश्तों में गर्माहट और बढ़ गई है।''

पीएम की इस यात्रा के दौरान ऊर्जा क्षेत्र में कई अहम समझौते होने के भी आसार है। एक समझौता भारत के पश्चिमी तट पर स्थापित होने वाली रिफाइनरी में सउदी कंपनी अरामको बड़ा निवेश करने जा रही है। यह भारत की सबसे बड़ी रिफाइनरी होगी। इसके अलावा इंडियन आयल और सउदी अरब की एक कंपनी के बीच एक समझौता भी होगा जिसके बाद भारतीय तेल कंपनी वहां रिटेल कारोबार में उतर सकेगी। भारत में कच्चे तेल के रणनीतिक भंडार में सउदी अरब की तरफ से किये जाने वाले निवेश के मसौदे को भी अंतिम रूप दिया जाएगा। सनद रहे कि सउदी अरब भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता देश है।

विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक दोनो देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाने पर भी बातचीत होगी और रणनीतिक साझेदारी परिषद के गठन के बाद यह काम और तेजी से आगे बढ़ेगा। भारत और सउदी अरब की नौ सेना के बीच पहला संयुक्त अभ्यास इस वर्ष के अंत में होने जा रहा है। सउदी अरब के सैन्य अधिकारियों को भी भारत में बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है और इसे और बढ़ाया जाएगा। भारत की रक्षा उपकरण कंपनियां सउदी अरब को एक बड़े बाजार के तौर पर देख रहा है। वहां रूपे कार्ड के इस्तेमाल को लेकर भी एक समझौता होगा।

Posted By: Manish Pandey

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