नई दिल्ली, एएनआइ। शिवसेना नेता संजय राउत ने राज्यसभा सभापति एम वेंकैया नायडू को पत्र लिखा। इस पत्र में उन्होंने कहा, 'यह जानकर आश्चर्य हुआ कि राज्यसभा चैम्बर में मेरे बैठने की जगह तीसरी से 5 वीं पंक्ति में कर दी गई। यह निर्णय किसी ने जानबूझकर शिवसेना की भावनाओं को आहत करने और हमारी आवाज को दबाने के लिए लिया है।' उन्होंने आगे कहा कि मैं इस अनुचित कदम के कारण को भी समझने में विफल रहा हूं क्योंकि एनडीए से हटाने के बारे में कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। इस निर्णय ने सदन की गरिमा को प्रभावित किया है। उन्होंने इस दौरान अनुरोध करते हुए 1/2/3 पंक्ति में सीट देनी की बात कही।

महाराष्ट्र में काफी समय से क्या हालात है, इस हर कोई भतीभांती जानता है। चुनाव हो जाने के बाद भी कई दिन बीत गए, लेकिन सरकार नहीं बनी। हां, राजनीति पूरे जोर पर है। शिवसेना-भाजपा का साथ छूट गया तो सरकार बनाने के लिए कांग्रेस-NCP और शिवसेना की तरफ सब देखने लगे। हालांकि, यहां भी अभी तक कोई बात नहीं तो फिलहाल कुछ दिनों पहले राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया।

शिवसेना सरकार ना बनने के बाद से ही भाजपा पर हमलावर है और वहीं यह हमला तब ज्यादा बढ़ गया जब भाजपा द्वारा शिवसेना को NDA से बाहर कर दिया गया। मंगलवार को सामना के संपादकीए में शिवसेना ने भाजपा पर काफी आरोप लगाए। आर्टिकल की हेड लाइन ही- हमें 'एनडीए' से निकालने वाले तुम कौन? थी।

इसमें कहा गया कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में से शिवसेना के नहीं होने की घोषणा की गई। दिल्ली के भाजपा नेताओं ने किस आधार पर और किसकी अनुमति से यह घोषणा की? इसके अलावा भी शिवसेना ने कई सवाल खड़े किए। इनमें- आज 'एनडीए' का प्रमुख या निमंत्रक कौन है इसका उत्तर मिलेगा क्या? शिवसेना को बाहर निकालने का निर्णय किस बैठक में और किस आधार पर लिया गया। ये सारा मामला इतनी हद तक क्यों गया? इस पर 'एनडीए' के सहयोगी दलों की बैठक बुलाकर चर्चा के बाद निर्णय हुआ है क्या?

Posted By: Nitin Arora

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