नई दिल्ली, पीटीआइ। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने पार्टी में सुधार की आवाज उठाने वाले जी-23 के नेताओं को आड़े हाथ लिया। खुर्शीद ने कहा कि केवल सवाल उठाकर ही पार्टी में सुधार नहीं होगा। उन्होंने कहा कि सुधार त्याग करने से आता है। हमको चुनौतियों से मिलकर निपटने की जरूरत है। बता दें कि जी-23 गुट ने संगठन में सुधार की फिर आवाज उठाई है। रविवार को एक साक्षात्कार में खुर्शीद ने ऐसे नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि सुधार उस चीज पर अचानक सवाल उठाने से नहीं आता, जिसका वर्षों तक फायदा उठाया गया हो, बल्कि यह त्याग से आता है।

उठाए सवाल

खुर्शीद ने सवाल किया कि जो लोग संगठनात्मक चुनावों की बात कर रहे हैं, क्या वे इसी तरह पार्टी में उस जगह पर पहुंचे है, जहां वे अभी हैं। गौरतलब है कि हाल ही में जी-23 के नेता एम वीरप्पा मोइली ने पार्टी को चुनावी रूप से अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए इसकी बड़ी सर्जरी की आवश्यकता जताई है।

राहुल पार्टी अध्यक्ष हों या न हों, वह हमारे नेता रहेंगे

मोइली के बयान पर खुर्शीद ने कहा कि ये अच्छे वाक्यांश उत्तर नहीं हैं, क्योंकि पार्टी नेताओं को पिछले दस वर्ष में पैदा हुई चुनौतियों से मिलकर निपटने की जरूरत है। खुर्शीद ने कहा कि यह फैसला राहुल गांधी को करना है कि वह पार्टी के अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ना चाहते हैं या नहीं। राहुल पार्टी अध्यक्ष हों या न हों, वह हमारे नेता रहेंगे।

बताएं कैसी कराना चाहते हैं सर्जरी

मोइली के बाद संगठन के सभी स्तर पर बड़े पैमाने पर सुधार की हाल की कपिल सिब्बल की टिप्पणी पर खुर्शीद ने कहा कि मैं सर्जरी की बात से खुश हूं, पर हटाया क्या जाएगा..मेरा लिवर, मेरी किड़नी। कोई बताएगा कि आप क्या सर्जरी कराना चाहते हैं।

सर्जरी के पहले एक्सरे की जरूरत

खुर्शीद कहते हैं कि सर्जरी तो होनी चाहिए, पर यह भी तो स्पष्ट हो कि उससे कोई क्या खोएगा और क्या पाएगा। सर्जरी के पहले एक्सरे, अल्ट्रासाउंड आदि की जरूरत होती है। 68 वर्षीय नेता ने पार्टी संगठन में फेरबदल, कांग्रेस वर्किग कमेटी सहित संगठन के विभिन्न स्तरों पर चुनाव, युवा नेताओं के पार्टी छोड़ने और कांग्रेस के कमजोर होने से जुड़े कई अन्य सवालों पर भी अपनी राय रखी।