नई दिल्ली, जेएनएन। कर्नाटक कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पार्टी के संकटमोचक माने जाने वाले डीके शिवकुमार को कोर्ट से राहत नहीं मिली है। दिल्ली की अदालत ने शिवकुमार की जमानत याचिका खारिज करते हुए उन्हें 13 सितंबर तक ईडी की हिरासत में भेज दिया है। ईडी ने मनी लांड्रिंग मामले में गिरफ्तार कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार की 14 दिनों की हिरासत मांगी थी।

बता दें कि कर्नाटक की सिद्दरमैया और कुमारस्वामी सरकार में मंत्री रहे शिवकुमार को पूछताछ के लिए चौथे दिन ईडी के सामने पेश हुए थे। इधर, जैसे ही शिवकुमार की गिरफ्तारी की खबर ईडी कार्यालय के बाहर मौजूद उनके समर्थकों को मिली तो वह नारेबाजी करने लगे। शिवकुमार को मेडिकल के लिए ले जाते समय जांच एजेंसी को समर्थकों के विरोध का सामना करना पड़ा। ईडी के अधिकारियों ने बताया कि कांग्रेस नेता को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत थी, इसीलिए पूछताछ के बाद उन्हें मनी लांड्रिंग अधिनियम के गिरफ्तार किया गया।

कर्नाटक की कनकपुरा विधानसभा सीट से विधायक शिवकुमार 30 अगस्त को पहली बार ईडी के सामने पेश हुए थे। बेंगलुरु से दिल्ली पहुंचने के बाद उन्होंने ईडी की जांच में सहयोग करने की बात कही थी। ईडी ने पिछले साल सितंबर में दर्ज किया था मामलाजांच एजेंसी ने पिछले साल सितंबर में शिवकुमार तथा नई दिल्ली स्थित कर्नाटक भवन के एक कर्मी हनुमंथैया के खिलाफ मनी लांड्रिंग कानून के तहत मामला दर्ज किया था। यह मामला आयकर विभाग द्वारा शिवकुमार के खिलाफ पिछले साल दाखिल एक आरोपपत्र के आधार पर दर्ज किया गया था। बेंगलुरु की विशेष अदालत में दाखिल इस आरोपपत्र में शिवकुमार पर कर चोरी तथा हवाला के जरिये करोड़ों रुपये के लेनदेन का आरोप लगाया गया है।

आर्थिक संकट से जनता का ध्यान हटाने का एक और प्रयास
कांग्रेस ने शिवकुमार की गिरफ्तारी को प्रतिशोध की राजनीति बताया है। पार्टी ने कहा कि यह कदम अपनी विफल नीतियों और आर्थिक संकट से जनता का ध्यान हटाने का एक और प्रयास है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने ट्वीट किया। उन्होंने कहा, 'डीके शिवकुमार की गिरफ्तारी केंद्र सरकार द्वारा राजनीतिक प्रतिशोध के तहत उठाया गया कदम है। चिदंबरम के बाद विधायकों की खरीद-फरोख्त और भाजपा की क्षुद्र राजनीति के खिलाफ खड़े होने वाले एक और नेता को सरकार के प्रतिशोध का सामना करना पड़ा है।'

अहमद पटेल को राज्यसभा चुनाव जिताने में निभाई थी अहम भूमिका
गुजरात में 2017 में राज्यसभा की तीन सीटों पर चुनाव होने थे। विधानसभा में विधायकों की संख्या के हिसाब से भाजपा अपने दो सदस्यों को आराम से जिता सकती थी। भाजपा की तरफ से राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, केंद्रीय स्मृति ईरानी और बलवंत राजपूत प्रत्याशी थे। जबकि कांग्रेस की तरफ से पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल मैदान में थे। इसी दौरान भाजपा ने कथित तौर पर कांग्रेस के असंतुष्ट विधायकों पर डोरे डालने शुरू किए। जब इसकी भनक कांग्रेस को लगी तो उसने अपने 44 विधायकों को कर्नाटक भेज दिया। उस समय वहां कांग्रेस की सरकार थी। डीके शिवकुमार ने कांग्रेस विधायकों को अपने रिजॉर्ट में रखा और अहमद पटेल चुनाव जीतने में कामयाब रहे। 

Posted By: Manish Pandey

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