पंजाब विधानसभा में SIR के खिलाफ प्रस्ताव हुआ पारित तो भड़की भाजपा, बोली- यह ध्यान भटकाने का हथकंडा
भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने शुक्रवार को पंजाब विधानसभा में मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने पर आम आदमी पार्टी सरकार की कड़ी आलोचना की।

पंजाब विस में एसआइआर के खिलाफ प्रस्ताव ध्यान भटकाने का हथकंडा: भाजपा
HighLights
भाजपा ने कहा, 13 अक्टूबर को आप समेत सभी दलों ने एसआईआर का स्वागत किया था
पंजाब विधानसभा में एसआईआर के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर दिया गया है
आईएएनएस, नई दिल्ली। भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने शुक्रवार को पंजाब विधानसभा में मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने पर आम आदमी पार्टी सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसे ध्यान भटकाने वाले हथकंडे की वापसी करार दिया।
एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए भंडारी ने कहा कि 13 अक्टूबर को आप और कांग्रेस समेत सभी राजनीतिक दलों ने एसआईआर प्रक्रिया का स्वागत किया था। इस प्रक्रिया के दौरान लगभग 13 लाख नाम मतदाता सूचियों से हटाए गए थे।
भंडारी ने आप के रुख में अचानक आए बदलाव पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जिस पार्टी ने पहले मतदाता सूची पुनरीक्षण का समर्थन किया था, वह अब विधानसभा में इसका विरोध कैसे कर सकती है?
भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि पंजाब में नशाखोरी, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था जैसे गंभीर मुद्दों पर घिरने के बाद आप सरकार ऐसे कदम उठा रही है।
राज्य के लोग आप के "नकली ड्रामे" और शासन की नाकामियों से ध्यान भटकाने की कोशिशों को साफ तौर पर समझ रहे हैं।
हाल की एक न्यायिक टिप्पणी का जिक्र करते हुए भंडारी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के 50 वार्डों में चुनाव रद कर दिए थे और आप को आड़े हाथों लेते हुए उसकी हरकतों को "लोकतंत्र के डकैतों" जैसा कारनामा बताया था।
न्यायपालिका की इस टिप्पणी से लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के प्रति पार्टी का रवैया और उजागर हुआ है। आप का ताजा कदम ऐसा है, मानो पार्टी एसआइआर के समर्थन में अपने पहले के रुख की खुद ही पड़ताल कर रही हो।
पंजाब विधानसभा में एसआइआर के खिलाफ प्रस्ताव पारित
चंडीगढ़ ब्यूरो के मुताबिक, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के खिलाफ पंजाब विधानसभा में शुक्रवार को प्रस्ताव पारित किया गया। यह प्रस्ताव वित्तमंत्री हरपाल सिंह द्वारा पेश किया गया, जिसे कांग्रेस व भाजपा के विधायकों की अनुपस्थिति में ही सर्वसम्मति से पारित किया गया।
इस दौरान मान ने एसआईआर को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले जनता वोट डालकर अपनी सरकार चुनती थी, लेकिन अब ऐसी स्थिति पैदा की जा रही है कि सरकार ही तय करने लगे कि कौन वोट डालेगा और किसका नाम मतदाता सूची से काट दिया जाएगा। लोकतांत्रिक तरीके से चुने हुए लोग ही तानाशाह बन रहे हैं।
