नई दिल्‍ली, जेएनएन। जागरण फोरम में धर्म, संस्कार और राजनीति सेशन में कांग्रेस नेता जनार्दन द्विवेदी, पूर्व केंद्रीय मंत्री आरिफ मोहम्मद खान, स्वामी चिदानंद सरस्वतीजी महाराज और सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल शामिल हुए। इस दौरान जनार्दन द्विवेदी ने कहा कि धर्म और राजनीति में ज्यादा विरोध नहीं देखता हूं, धर्म और राजनीति एक ही तत्व को प्रदर्षित करते हैं। महात्मा गांधी राजनीति और धार्मिक दोनों ही है। धर्म और राजनीति पर बड़ी चर्चा होनी चाहिए। दैनिक जागरण ने अपनी सृजन यात्रा के 75 वर्ष पूरे कर लिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दो दिवसीय फोरम का उद्घाटन किया।

कृष्ण गोपाल बोले- जहां धर्म है, वहां सत्‍य
धर्म का अर्थ विशेष संप्रदाय नहीं है। धर्म का काम जीवन को दिशानिर्देशित करना है। जहां धर्म है वहां सत्य है। महात्‍मा गांधी ने कहा था कि अगर राजनीति में धर्म नहीं है तो वह मरी हुई देह के समान है, उसमें से गंध आने लगेगी। दो समूह में धर्म निर्धारित होता है। धर्म का मूल उद्देश्य लोगों को संस्कार देना है, वह किस पद्वति से देंगे ये अलग बात है।

स्वामी चिदानंद ने कहा, यंग इंडिया को तंग इंडिया नहीं बनना चाहिए
धर्म हमारे अंदर मन का निर्माण करता है। पीआर से व्यापार बढ़ सकता है, प्यार और परिवार नहीं बढ़ता। यंग इंडिया को तंग इंडिया नहीं बनना चाहिए। सब मिलकर आगे बढ़ें ये ही धर्म का सार है। धर्म के अर्थ को समझने पर व्यक्ति सत्य, करुणा के मार्ग पर चलने लगता है। जागरण ही जीवन है और बिना जागरण के जीना कोई जीना नहीं है। जब जीवन यज्ञ बन जाता है, तब बदलाव देखने को मिलता है। पिछले चार सालों में मुझे काफी बदलाव देखने को मिला है। स्‍वच्‍छ भारत अभियान का प्रभाव मुझे ऋषिकेश से दिल्‍ली तक नजर आया।

आरिफ मोहम्मद खान ने कहा, धर्म का अर्थ है बुद्धिमता के साथ करुणा
आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि धर्म का अर्थ है बुद्धिमता के साथ करुणा है। धर्म तो एक व्यक्ति के असंख्य हो सकते हैं। काल और स्थान के अनुसार, देश के अनुसार धर्म बदलता है। धर्म दूसरे के लिए काम करने की भावना।मेरा मानना है कि आप जितने भी कानून बना लीजिए, लेकिन जब तक शिक्षा और संस्‍कार नहीं देंगे, तब तक उन्‍हें लागू नहीं कराया जा सकता है। इसलिए हमें शिक्षा पर काम करने की बेहद जरूरत है। लोग शिक्षित होंगे, तो हमारे देश की कई समस्‍याएं खुद-ब-खुद सुलझ जाएंगी।

जनार्दन द्विवेदी बोले- धर्म और राजनीति पर होनी चाहिए बड़ी बहस
इस दौरान जनार्दन द्विवेदी ने कहा कि धर्म और राजनीति में ज्यादा विरोध नहीं देखता हूं, धर्म और राजनीति एक ही तत्व को प्रदर्षित करते हैं। महात्मा गांधी राजनीति और धार्मिक दोनों ही है। धर्म का उपयोग जब अपने लिए होने लगता है तब उसमें विकार आ जाता है। पहले जब कोई खादी पहनकर निकलता था, तब उसे अच्‍छा व्‍यक्ति समझा जाता था। लेकिन आज जब कोई खादी का कुर्ता पहनकर निकलता है, तो माना जाता है कि यह गलत आदमी होगा। ये धारणा कहां से आई, इसे समझने की आवश्‍यकता है।

Posted By: Tilak Raj