नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। कोविड जैसी वैश्विक समस्या के काल में जब राजस्व संग्रह बहुत बड़ी चुनौती होती है तब संसाधन के साथ-साथ सुधार की गाड़ी को खींचना केवल आस्था और प्रोत्साहन से ही संभव है। केंद्र और राज्यों की भागीदारी से भारत ने यह बखूबी किया, जिसका लाभ राज्यों के साथ ही जनता को भी मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने नए ब्लाग में इसका जिक्र किया है।

कहा, केंद्र ने आत्मनिर्भर पैकेज के जरिये उद्योग धंधों और आम जनता को पहुंचाई राहत

प्रधानमंत्री ने कहा है कि कोविड काल में केंद्र सरकार ने एक तरफ जहां आत्मनिर्भर पैकेज के जरिए उद्योग धंधों व आम जनता को राहत दी, वहीं राज्य सरकारों के लिए उधारी की सीमा भी बढ़ाई थी ताकि उनके पास संसाधन हो। शर्त सिर्फ इतनी थी कि केंद्र ने इसे चार सुधारों से जोड़ दिया था जिसने सुधार की गाड़ी बढ़ाई उसे फायदा मिला और आखिरकार जनता इससे लाभान्वित हुई।

'आस्था और प्रोत्साहन के जरिए सुधार' के अपने ब्लाग में मंगलवार को प्रधानमंत्री ने कोविड के कारण सरकारों पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि कोविड ने विश्व के सामने वित्तीय संकट भी खड़ा किया, लेकिन केंद्र और राज्य की भागीदारी से भारत में राज्यों ने 2020-21 में 1.6 लाख करोड़ रुपये अतिरिक्त जुटाए। भारत जैसी संघीय व्यवस्था में केंद्र की ओर से तैयार सुधार माडल को राज्यों में क्रियान्वित कराना आसान नहीं होता है, लेकिन जब केंद्र सरकार ने आत्मनिर्भर पैकेज तैयार किया तो उसी में सुधार को भी एक हिस्सा बना दिया और राज्यों में इसे लागू कराना आसान हो गया।

चार सुधारों से जोड़कर राज्यों के लिए उधारी की सीमा भी बढ़ाई, 23 राज्यों ने इसका लाभ उठाया

चार सुधार चुने गए और प्रत्येक के साथ राज्यों की जीडीपी का 0.25 फीसद उधारी से जुटाने का रास्ता तैयार किया गया। राज्यों को पांच फीसद तक उधारी उठाने की अनुमति होती है। कोविड काल में उन्हें दो फीसद अतिरिक्त उधारी उठाने की छूट दी गई, जिसमें से एक फीसद को शर्त के साथ जोड़ दिया गया था। प्रधानमंत्री ने बताया कि इस प्रयोग ने इस भ्रम को तोड़ दिया है कि सुधार के साथ कदम बढ़ाने वाले कम होते हैं। 23 राज्यों ने इसका लाभ उठाया। प्रधानमंत्री ने बताया कि सुधार के साथ वित्तीय प्रोत्साहन को जोड़कर केंद्र मुख्यत: दो मकसद हासिल करना चाहता था।

पहला- जनता और खासकर गरीब और मध्यमवर्ग के लिए इज आफ लिविंग बढ़े और दूसरा कि राज्यों के संसाधन में स्थिरता आए। इसी मकसद से वन नेशन वन राशन कार्ड को लागू करने पर बल दिया गया ताकि प्रवासियों को भी पारदर्शिता के साथ जहां है वहीं राशन मिले। बिजनेस शुरू करने के लिए जरूरी सात लाइसेंस को आनलाइन करने, प्रॉपर्टी टैक्स, वाटर टैक्स, सीवरेज चार्ज आदि को अधिसूचित करने तथा चौथा किसानों को मुफ्त बिजली देने की बजाय उनके खाते में पैसा ट्रांसफर करने से जुड़ा सुधार था।

राशन कार्ड को आधार नंबर से जोड़ा जाए 

पहले सुधार के तहत उन्होंने उल्लेख किया कि 'वन नेशन वन राशन कार्ड' नीति के तहत राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत राज्य के सभी राशन कार्डों को सभी परिवार के सदस्यों के आधार नंबर के साथ जोड़ा जाए। इसके साथ यह भी हो कि सभी उचित मूल्य की दुकानों में इलेक्ट्रॉनिक प्वाइंट ऑफ सेल उपकरण उपलब्ध हो।

फर्जी कार्ड और डुप्लिकेट सदस्यों के खत्म होने से मिलेगा वित्तीय लाभ

पीएम मोदी ने कहा कि इसका मुख्य लाभ यह है कि देश में कहीं से भी प्रवासी श्रमिक अपना राशन प्राप्त कर सकते हैं। नागरिकों को इन लाभों के अलावा फर्जी कार्ड और डुप्लिकेट सदस्यों के खत्म होने से वित्तीय लाभ होगा। 17 राज्यों ने इस सुधार को पूरा किया और उन्हें 37,600 करोड़ रुपये की अतिरिक्त उधारी दी गई।

व्यापार करने में आसानी हो, इंस्पेक्टर राज से मिले मुक्ति 

दूसरे सुधार के तहत व्यापार करने में आसानी में सुधार लाने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि कंप्यूटरीकृत रैंडम निरीक्षण प्रणाली का आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। इसमें अन्य अधिनियमों के तहत उत्पीड़न और भ्रष्टाचार को कम करने के लिए निरीक्षण की पूर्व सूचना देनी होगी। यह सुधार (19 कानूनों को शामिल करते हुए) सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए विशेष रूप से सहायक होंगे, जो इंस्पेक्टर राज के बोझ में सबसे अधिक पीड़ित हैं। यह एक बेहतर निवेश माहौल, अधिक निवेश और तेज विकास को भी बढ़ावा देगा। 20 राज्यों ने इस सुधार को पूरा किया और उन्हें 39,521 करोड़ रुपये की अतिरिक्त उधारी की अनुमति दी गई।

राज्य और नगरपालिकाएं छोटे स्तर पर खुद पैदा करें राजस्व

तीसरे सुधार के तहत राज्यों से यह अपेक्षा थी कि वे शहरी क्षेत्रों में संपत्ति टैक्स, पानी एवं सीवरेज शुल्क के फ्लोर रोट को अधिसूचित करें। इससे शहरी गरीबों और मध्यम वर्ग के लोगों को बेहतर गुणवत्ता की सेवा हासिल हो सकेगी। पीएम मोदी ने कहा कि 15वें वित्त आयोग और कई शिक्षाविदों ने ठोस संपत्ति कराधान के महत्व पर जोर दिया है। राज्यों को संपत्ति कर और पानी व सीवरेज शुल्क की न्यूनतम दरों को शहरी क्षेत्रों में संपत्ति लेनदेन और वर्तमान लागत के लिए क्रमशः स्टांप शुल्क दिशा-निर्देश मूल्यों के अनुरूप अधिसूचित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस सुधार से नगरपालिका कर्मचारियों को भी लाभ होता है, जिन्हें अक्सर मजदूरी के भुगतान में देरी का सामना करना पड़ता है। 11 राज्यों ने इन सुधारों को पूरा किया और उन्हें 15,957 करोड़ रुपये की अतिरिक्त उधारी दी गई।

किसानों को करें मुफ्त बिजली की जगह डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर

चौथे सुधार के तहत किसानों को मुफ्त बिजली आपूर्ति के बदले डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) की शुरुआत करनी होगी। उन्होंने कहा कि वर्ष के अंत तक पायलट आधार पर एक जिले में वास्तविक कार्यान्वयन के साथ एक राज्यव्यापी योजना तैयार करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि जीएसडीपी के 0.15 फीसद की अतिरिक्त उधारी इससे जुड़ी है। इसका एक घटक तकनीकी और वाणिज्यिक घाटे में कमी करना और दूसरा राजस्व और लागत (प्रत्येक के लिए जीएसडीपी का 0.05 फीसद) के बीच के अंतर को कम करना है। यह वितरण कंपनियों के वित्त में सुधार करता है। पानी और ऊर्जा के संरक्षण को बढ़ावा देता है और बेहतर वित्तीय और तकनीकी प्रदर्शन के माध्यम से सेवा की गुणवत्ता में सुधार करता है। 

राज्यों का जताया आभार

पीएम मोदी ने कहा कि भारत जैसे विशाल और जटिल देश में यह एक विशिष्ट अनुभव है। हमने अक्सर यह देखा है ​कि कई वजहों से योजनाओं और सुधारों का पहिया वर्षों तक आगे नहीं बढ़ पाता है। यह अतीत के मुकाबले सुखद रूप से अलग बात है कि केंद्र और राज्य महामारी के दौर में बहुत कम समय में जनअनुकूल सुधार करने के लिए साथ आए हैं। यह हमारे सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास वाले रवैये की वजह से संभव हो पाया है।

 

 

Edited By: Arun Kumar Singh