नई दिल्ली [ साक्षात्कार ]। तीन तलाक विधेयक पर संसद की मंजूरी ने जहां बड़े सामाजिक बदलाव का रास्ता साफ कर दिया वहीं केंद्रीय राजनीति में भी बड़ी चर्चा छेड़ दी। चुनाव के बाद अब विपक्षी साथी दलों के बीच भी कांग्रेस हाशिए पर खड़ी हो गई। भाजपा सामाजिक बदलाव की राजनीति के तहत विस्तार में जुटी है और विपक्ष चाहकर भी विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा पाता है। विधेयक की ड्राफ्टिंग में अहम भूमिका निभाने वाले केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद का मानना है कि कांग्रेस ने विरोध कर चूक कर दी। अब जबकि पाकिस्तान में भी तीन तलाक को आपराधिक बनाने की सोच तैयार हो रही है तो यहां इसे गैर आपराधिक बनाकर कांग्रेस कानून को कमजोर क्यों करना चाहती थी।

[ साक्षात्कार- रविशंकर प्रसाद, केंद्रीय कानून, संचार व सूचना प्रोद्यौगिकी मंत्री] नितिन प्रधान और आशुतोष झा से रविशंकर की बातचीत का एक अंश:

प्रश्न-सरकार ने तीन तलाक बिल पास करा लिया है। यह सफलता तीसरी बार में मिली। सवाल यह है कि पहले भी आप नंबर में कम थे और आज भी राज्यसभा में राजग का नंबर कम है, लेकिन पास करा लिया। यह इच्छाशक्ति पहले क्यों नहीं दिखायी?

उत्तर: यह याद रखिए कि हम दोबारा बड़े बहुमत से जीत कर आये हैं और राजनीतिक दलों को सकारात्मक राजनीति का असर महसूस हो रहा है। दलों के सोचने का तरीका बदला है। मुझे कांग्रेस के व्यवहार पर आश्चर्य हुआ है कि वह क्यों नहीं समझ पा रही है। 2019 की कांग्रेस भी 1986 के शाहबानों के घेरे में चल रही है। और इसका नतीजा देखिए कि 1984 में 400 का बहुमत आने के बाद नौ लोकसभा चुनाव हुए, कांग्रेस को फिर कभी बहुमत नहीं मिला। दूसरी तरफ सकारात्मक सोच वाली मोदी सरकार लगातार पिछली बार से बढ़ती जा रही है।

कांग्रेस ने पहले इतनी हिम्मत दिखायी थी कि पहली पत्नी के होते हुए या पहले पति के होते दोबारा विवाह किया तो विवाह तो अवैध होगा ही, सात साल की सजा का भी प्रावधान किया। लडके और लड़की के लिए शादी की न्यूनतम आयु 21 और 18 साल तय की। दहेज निषेध कानून को जमानती से गैर-जमानती बनाया। जिस समय वे दहेज कानून को सख्त बना रहे थे, उसी वक्त 125 रुपये की खोरिश के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को उलट कर शाहबानो को न्याय से वंचित कर दिया।

सच्चाई यह है कि 2019 में भी कांग्रेस पार्टी खवातीनों के साथ अन्याय के मूड में है। शाहबानो भी सुप्रीम कोर्ट का फैसला था, सायरा बानो भी सुप्रीम कोर्ट का फैसला था। अंतर एक था कि अब नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री हैं। दूसरा अंतर शाहबानो अकेली खड़ी थी। आज सारे समाज की बेटियां खड़ी थीं। केवल मुस्लिम नहीं दूसरे समाज की बेटियां भी खड़ी थी। इसीलिए यह ऐतिहासिक कदम बना। इच्छाशक्ति हमारी पहले भी थी और आज भी है।

प्रश्न- इस विवादित विधेयक को पारित कराने के लिए राज्यसभा में किस तरह का फ्लोर मैनेजमेंट करना पड़ा?

उत्तर- हमने सभी दलों को समझाया कि यह समय की जरूरत है। बदलती हवा को समझिए। लोगों ने समझा।

प्रश्न- विपक्ष के कई दलों के वाकआउट और कईयों की गैर मौजूदगी क्या फ्लोर मैनेजमेंट था?

उत्तर- मैं ज्यादा कुछ नहीं बताना चाहता। केवल इतना कहूंगा कि हमने भी विधेयक में सार्थक और तार्किक परिवर्तन किए थे। बेल का प्रावधान किया अगर पत्नी राजी हो जाए। हमने दलों को सहमत करने की कोशिश की। कुछ माने कुछ पुरानी सोच पर अड़े रहे जो गलत था।

प्रश्न- आप या आपकी सरकार कब आश्र्वस्त हो गई कि तीन तलाक राज्य सभा में पास हो जाएगा?

उत्तर- देखिये ये हिम्मत की बात है। फिर कहूंगा कि पहले भी कोशिश की थी, लेकिन बात नहीं बनी। प्रधानमंत्री ने पिछले 15 अगस्त को कहा था कि मैं तीन तलाक की बेटियों को न्याय दिलाकर रहूंगा। तो यह करना ही था। प्रधानमंत्री जी का अभिनंदन करूंगा कि वे कभी पीछे नहीं हटे। पार्टी में भी कुछ लोग चाहते थे कि इसे पारित कराने के लिए विपक्ष की बात मान ली जाए और इसे गैर आपराधिक बना दिया जाए। लेकिन फिर हमारी प्रतिबद्धता का क्या होता। हम आश्वस्त थे कि देर ही सही यह पारित होगा।

प्रश्न- जो साहस दिखाता है उसे फायदा मिलता है। क्या आपको राजनीतिक लाभ मिलेगा?

उत्तर- मैं कहना चाहूंगा कि हमें फायदा बहुत मिल चुका है। हम जीत चुके हैं। इतनी बड़ी ऐतिहासिक जीत हुई है। इसलिए हम इसे वोट के नफा या नुकसान से नहीं जोड़ते हैं। हम मानते हैं कि हमें उनका कम वोट मिलता है। लेकिन हम सबके लिए काम करते हैं। ये सामाजिक बदलाव के लिए जरूरी था। पाकिस्तान की संवैधानिक बॉडी ने भी अब भारत की तर्ज पर इसे आपराधिक बनाने का सुझाव पाक सरकार को दिया है। भारत ने जो नई शुरुआत की है उसकी आवाज पड़ोस में भी सुनाई पड़ी है। पूरी दुनिया ने इसे देखा और समझा है।

प्रश्न- यह बात विपक्ष को क्यों नहीं समझ में आती?

उत्तर - वही तो मैं कह रहा हूं कि 400 से 44 और 52 पर आने के बावजूद इन लोगों को यह समझ में नहीं आ रहा है। मेंरे लिए जिंदगी का सबसे महत्वपूर्ण क्षण था जब ये सारी बेटियां लड्डू लिए घर पर मेरा इंतजार कर रही थीं। उनकी आंखों में खुशी की चमक थी जो मेरे लिए बड़ी उपलब्धि थी। यह नये भारत की शुरुआत है। यह देश अब बदल रहा है।

प्रश्न- कभी इस मुद्दे पर सदन के अलावा मुस्लिम सांसदों से अलग से बातचीत की कोशिश हुई सरकार की तरफ से?

उत्तर- इस पूरे मामले में स्टेक होल्डर कौन है? मुस्लिम बेटियां हैं। सियासत की रोटी सेंकने वाले नेता नहीं है। उनसे मेरा सार्थक संवाद बना हुआ था। सैंकड़ों की संख्या में मैं ऐसी बेटियों से मिला और आगे भी मिलता रहूंगा। मैंने उनके दर्द को समझा और यह कानून उनके दर्द पर मरहम लगाता है।

नेताओं की तरफ से तो मेरे यहां पैरवी आ ही रही थी कि इसे आपराधिक न बनाये। मुझे इनसे बात नहीं करनी थी। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भी कोई काम नहीं किया। केवल तीन तलाक बिल का विरोध किया, लेकिन जब समाज सुधार के लिए बड़ा कदम उठता है तो उसे कोई रोक नहीं पाता है।

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Posted By: Bhupendra Singh

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