नईदुनिया, रायपुर। छत्तीसगढ़ में ऐन विधानसभा चुनाव से पहले आई भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की रिपोर्ट ने रमन सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कैग ने सरकार के कमजोर वित्तीय प्रबंधन व करोड़ों के नुकसान तथा बजट का 20 फीसद धनराशि खर्च न कर पाने पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

इससे विपक्षी दलों को सरकार पर हमलावर होने का एक बड़ा मुद्दा मिल गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल और नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने कहा कि कैग ने मुख्यमंत्री रमन सिंह की सरकार के वित्तीय अपराध में संलिप्त होने का प्रमाण दिया है।

कैग रिपोर्ट में क्या है खास 
प्रधान महालेखाकार बीके मोहंती ने विधानसभा में कैग रिपोर्ट रखने के बाद पत्रकारों को बताया कि सरकार ने कर्ज चुकाने के लिए कर्ज लिया। पब्लिक सेक्टर की यूनिट को फंड दिया, लेकिन उनके लाभ में हिस्सेदारी नहीं ले पाई। इसका बुरा असर यह हुआ कि कर्ज पर ब्याज भी सरकार को चुकाना पड़ रहा है। यही नहीं सीएसपीडीसीएल के 1955 करोड़ ऋण की आडिट आपत्ति पर भी सरकार घिरी है।

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सरकार को 225 करोड़ का आर्थिक नुकसान 
बिजली कंपनी ने कृषि जीवन ज्योति योजना के लिए लोन लिया, लेकिन इस लोन के बारे में सरकार के खाते में कोई जानकारी ही नहीं है। आपदा प्रबंधन के फंड का न तो इस्तेमाल किया, न ही उसे बैंक में जमा किया। इसके कारण सरकार को 225 करोड़ का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। सरकार ने आठ पीएसयू के लिए छह हजार 778 करोड़ रुपये की लोन गारंटी दी है। सरकार को 16 रिजर्व फंड में 4141 करोड़ रुपये मिले, लेकिन इसमें से सिर्फ 1800 करोड़ रुपये का निवेश किया गया। सरकार के 194 प्रोजेक्ट अधूरे हैं, जिसमें पांच हजार 912 करोड़ की राशि फंसी हुई है।

जनप्रतिनिधियों को बताए बिना अफसरों ने मनमाने तरीके से खर्च की धनराशि 
मोहंती ने बताया कि केंद्र सरकार से सीधे कलेक्टरों और विभागों को 1112 करोड़ रुपये की राशि जारी हुई। विधायकों की जानकारी के बिना ही यह विभागों ने मनमाने ढंग से खर्च कर दी गई।

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धान बोनस के बजट से पहले सड़क से सदन तक महंगाई पर हंगामा 
छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र में बुधवार को धान बोनस व चुनावी खर्च के लिए 2433.18 करोड़ रुपये से अधिक का अनुपूरक बजट पास किया गया। इससे पहले महंगाई को लेकर प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने सड़क से सदन तक हंगामा किया। बैलगाड़ी से विधानसभा पहुंचने की कांग्रेसियों की जिद के कारण सड़क पर उनका पुलिस से आमना- सामना भी हुआ। इससे ज्यादातर कांग्रेसी विधायक करीब डेढ़ घंटे विलंब से सदन में पहुंचे। कांग्रेस ने इसे विशेषाधिकार हनन बताते हुए दोषियों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की। हंगामा बढ़ने पर अध्यक्ष गौरी शंकर अग्रवाल को सदन 10 मिनट के लिए स्थगित करना पड़ा।

 

Posted By: Arun Kumar Singh