भोपाल, स्टेट ब्यूरो। नौ अप्रैल को मध्यप्रदेश से रिक्त हुई तीन राज्यसभा की सीटों के मतदान की तारीख आते ही एक बार फिर सियासत गरमा गई है। राज्यसभा चुनाव की पूर्व निर्धारित तारीख के पहले ही मप्र की सियासत के सारे समीकरण बदल गए थे। पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस का साथ छोड़कर भाजपा की ओर से राज्यसभा चुनाव का नामांकन भरा था।

कोरोना और लॉकडाउन के चलते 26 मार्च को मतदान स्थगित कर दिया गया था

कोरोना और लॉकडाउन के चलते 26 मार्च को मतदान स्थगित कर दिया गया था। पार्टी ने दूसरी सीट पर आदिवासी चेहरे प्रो. सुमेर सिंह सोलंकी को प्रत्याशी बनाया है। संख्या बल के हिसाब से दोनों ही सीटों पर भाजपा की जीत सुनिश्चित है।

संख्या बल के हिसाब से भाजपा को दो और कांग्रेस को एक सीट मिलेगी

मौजूदा संख्या बल के हिसाब से जीत के लिए भाजपा को एक सीट पर 52 विधायकों के वोट चाहिए। पार्टी के पास 107 विधायक हैं, इसलिए तीसरी सीट कांग्रेस के खाते में आएगी।

सियासी ड्रामा चला, सिंधिया ने 22 समर्थक विधायकों के साथ छोड़ दी थी कांग्रेस

राज्यसभा के मप्र में होने वाले चुनाव से पहले प्रदेश में एक महीने तक सियासी ड्रामा चला। कांग्रेस में उपेक्षित महसूस कर रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने राज्यसभा के लिए कांग्रेस का टिकट नहीं मिलने के कारण अपने 22 समर्थक विधायकों के साथ पार्टी छोड़ दी थी। इसके बाद सिधिया ने भाजपा से राज्यसभा चुनाव का पर्चा भरा। दूसरी सीट पर आदिवासी चेहरा ब़़डवानी के शहीद भीमा नायक पीजी कॉलेज में इतिहास के प्रोफेसर रहे डॉ. सुमेरसिंह सोलंकी को भाजपा ने राज्यसभा चुनाव में दूसरी सीट के लिए प्रत्याशी बनाया है। आदिवासी वर्ग से आने वाले सोलंकी ने नौकरी छोड़कर राजनीति में आए हैं। गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, प्रभात झा और सत्यनारायण जटिया मप्र से राज्यसभा सदस्य थे। तीनों का कार्यकाल 9 अप्रैल को ही खत्म हुआ है।

Posted By: Bhupendra Singh

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