नई दिल्ली, आइएएनएस। हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन की विस्तारवादी नीति के बीच भारत ने भी अपना रुख साफ कर दिया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को स्पष्ट रूप से कहा कि भारत अपने समुद्री हितों की रक्षा को लेकर पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। वह इससेकोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि आतंकवाद, मादक पदार्थों की तस्करी और जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर खतरों के बढ़ने से हिंद प्रशांत क्षेत्र में नई चुनौतियां पैदा हो गई हैं।

चुनौतियों का पड़ रहा व्‍यापक प्रभाव

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि हिंद प्रशांत क्षेत्र उत्पन्न चुनौतियों के विभिन्न देशों पर व्यापक प्रभाव हैं। ऐसे में नौवहन से जुड़े मुद्दों पर हितों को लेकर एकरूपता और उद्देश्यों की समानता तलाश करने की जरूरत है। वह हिंद प्रशांत क्षेत्र पर आयोजित एक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

सभी देशों के अधिकारों का सम्‍मान करने को प्रतिबद्ध

रक्षा मंत्री ने कहा कि समृद्धि के स्थिर मार्ग को बनाये रखने के लिये जरूरी है कि इस क्षेत्र की नौवहन क्षमता का प्रभावी, सहयोगी और सहकारी रूप से उपयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि भारत सभी देशों के वैध अधिकारों का सम्मान करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसका उल्लेख समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र संधि 1982 में किया गया है।

चीन के रुख से चिंता

उनकी यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते विस्तारवादी रुख को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ रही है। इसके चलते कई देशों को इन चुनौतियों से निपटने के लिये अपनी रणनीति बनाने को मजबूर होना पड़ा है।

समुद्री संपर्कों की अहमियत बताई

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि किस तरह से समुद्र ने मानव इतिहास में उसकी उत्पत्ति से लेकर संस्कृति सहित विभिन्न आयामों को आकार प्रदान करने का काम किया। उन्होंने कहा कि समुद्री संपर्कों ने श्रीलंका से दक्षिण पूर्व एशिया और कोरिया तक बौद्ध धर्म को ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने इस संदर्भ में अयोध्या की राजकुमारी का कोरिया के राजकुमार से विवाह का उदाहरण भी दिया।

Edited By: Krishna Bihari Singh