बेंगलुरु, प्रेट्र। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत सरकार की मेक इन इंडिया नीति की सफलता को इंगित करते हुए कहा कि भारत का मौजूदा सालाना रक्षा निर्यात 17,000 करोड़ रुपये से बढ़कर वर्ष 2024 तक 35,000 करोड़ रुपये हो जाएगा। यानी अगले चार साल में यह बढ़त दोगुनी से भी अधिक होगी।

रक्षा मंत्री ने गुरुवार को कर्नाटक के राज्योत्वस कार्यक्रम में बताया कि उन्हें इस बात में कोई संदेह नहीं है कि भारत वर्ष 2030 तक विश्व में तीन प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शुमार होगा और इसमें रक्षा क्षेत्र के उद्योग की अहम भूमिका होगी। इस बात का उन्हें पूरा विश्वास है। उन्होंने कहा, 'भारत का रक्षा निर्यात बढ़ रहा है। पिछले दो सालों में हमारा निर्यात बढ़कर 17,000 करोड़ रुपये हो गया है। लेकिन एचएएल (¨हदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) की क्षमताओं को देखते हुए कहा जा सकता है कि आने वाले सालों में यानी वर्ष 2024 तक यह निर्यात 35,000 करोड़ रुपये का हो जाएगा।'

मेक इन इंडिया के लक्ष्य में निभानी है अहम भूमिका

राजनाथ सिंह ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों से कहा कि भारत केवल आयात पर लंबे समय तक निर्भर नहीं रह सकता है। इसलिए भारतीय कंपनियों, विशेषकर रक्षा क्षेत्र में सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों, को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मेक इन इंडिया' के लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभानी है। हम भारत को आयातक देश के रूप में नहीं देखना चाहते। इसलिए क्षमताओं को देखते हुए हम कह सकते हैं कि भारत निश्चित रूप से एक निर्यातक देश बनेगा। अब उसे कोई नहीं रोक सकता।

एचएएल का प्रदर्शन रहा अच्छा

उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई के तौर पर एचएएल की तारीफ करते हुए कहा कि उसका प्रदर्शन ऑपरेशंस और फाइनेंस दोनों में ही अच्छा रहा है। मार्च, 2019 तक इस कंपनी का टर्नओवर 19,705 करोड़ रुपये था और एचएएल ने अपने शेयरधारकों को 198 फीसद के डिविडेंट दिए। उन्होंने बताया कि इस दौरान कंपनी ने एलसीए (तेजस) और हल्के युद्धक हेलीकॉप्टर (एलसीएच) समेत सात विभिन्न मंचों पर अभियान संबंधी मंजूरी हासिल कर ली है। हॉक और एसयू-30 को लेकर भी अच्छा काम किया गया है।

Posted By: Dhyanendra Singh

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