नरेन्द्र शर्मा, जयपुर। मध्यप्रदेश के बाद अब राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार प्रदेश में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) लागू नहीं करने का मानस बनाया है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस बारे में गृह और विधि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल अधिकारियों द्वारा की जा रही तैयारियों पर निगरानी रख रहे हैं। राज्य विधानसभा का बजट सत्र समाप्त होते ही इस बारे में अधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी। 

सीएए-2019 के तहत नहीं की गई एनपीआर की अधिसूचना

विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक सीएम ने अधिकारियों को कहा है कि एनपीआर की अधिसूचना जारी होने के बाद जिस तरह का संशय का माहौल बना हुआ है, उसे लेकर इसे प्रदेश में लागू नहीं किया जाएगा। केंद्र के कानून को लागू नहीं करने को लेकर किस तरह से अधिकारिक निर्णय लिया जाए, इस बारे में अधिकारी और संसदीय कार्यमंत्री कसरत कर रहे हैं। राज्य सरकार का मानना है कि एनपीआर की अधिसूचना नागरिकता संशोधन अधिनियम-2019 (सीएए) के तहत नहीं की गई है। 

देश का माहौल खराब करना चाहती है केंद्र सरकार: धालीवाल  

उल्लेखनीय है कि गहलोत सरकार राज्य विधानसभा में सीएए,एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ जनवरी माह में संकल्प पारित करा चुकी है। धारीवाल का कहना है कि केंद्र सरकार का प्रयास संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। इससे देश की एकता और अखंडता को खतरा है। सीएए, एनआरसी और एनपीआर के माध्यम से केंद्र सरकार देश का माहौल खराब करना चाहती है।

प्रदेश के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री भंवरलाल मेघवाल ने कहा कि तीनों के खिलाफ विधानसभा में संकल्प पारित किया और अब इन्हे लागू नहीं करने को लेकर अधिकारिक निर्णय शीघ्र लिया जाएगा। करीब पांच दिन पूर्व मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार ने भी एनपीआर लागू नहीं करने की बात कही है।

Posted By: Dhyanendra Singh

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