नई दिल्‍ली, जेएनएन। भारतीय जनता पार्टी के नए राजस्‍थान प्रमुख मदनलाल सैनी अलवर में हुई बेकाबू भीड़ की हिंसा(मॉब लिंचिंग) पर विवादित बयान देकर घिर गए हैं। उन्‍होंने बाबर और हुमायूं का एक ऐसा किस्‍सा सुनाया, जिस पर विवाद खड़ा हो गया है। मदनलाल सैनी ने ये किस्‍सा एक इंटरव्‍यू के दौरान सुनाया। हालांकि वह पहले ऐसे भाजपा नेता नहीं हैं, जो अपने बयान के बाद विवादों में घिरे हैं। इससे पहले त्रिपुरा के मुख्‍यमंत्री बिप्लब देब और केंद्र सरकार में मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री सत्यपाल सिंह भी ऐसे बयान देकर विवादों में घिरते रहे हैं।

राजस्‍थान के अलवर में हुई उन्‍मादी हिंसा का मुद्दा सड़क से संसद तक गूंज रहा है। मदनलाल सैनी ने इस मामले पर एक इंटरव्यू में कहा, 'किसी भी समाज देश धर्म ये श्रद्धा के मुद्दों का सम्मान सभी लोगों को करना चाहिए। मुझे याद आता है जब हुमायूं मरा था उस समय उसने बाबर को बुलाया और उन्होंने कहा हिंदुस्तान में तुम्हे शासन करना है तो इन तीन चीजों का ध्यान रखना। एक तो गाय, ब्राह्मण और महिला इनकी इज्जत पर किसी भी प्रकार का अपमान नहीं होना चाहिए। हिंदुस्तान इसको सहन नहीं करता है। मैं आपको याद दिलाना चाहता हुं कि कट्टर से कट्टर औरंगजेब के वक्त भी गौहत्या बंद थी।'

बता दें कि हुमायूं, बाबर का बेटा था। जब हुमायूं बीमार पड़ा तबतक बाबर की मौत हो चुकी थी। बाबर की मौत सन् 1531 में हुई थी। वहीं हुमायूं की मौत 25 साल बाद 1556 में हुई थी।

 

त्रिपुरा के सीएम ने कहा- महाभारत काल से भारत में इंटरनेट
हालांकि मदनलाल सैनी पहले ऐसे भाजपा नेता नहीं हैं, जिन्‍होंने वैज्ञानिक तथ्‍यों को नकारा है। इससे पहले त्रिपुरा के सीएम बिप्लब देब ने कहा कि भारत में महाभारत काल के समय से ही इंटरनेट का इस्तेमाल हो रहा है। उन्होंने कहा था कि मैं गर्व करता हूं कि मेरा जन्म ऐसे देश में हुआ जो तकनीक की दुनिया में आगे था। भले ही आज यूरोप-अमेरिका तकनीक के आविष्कार का दावा करें, लेकिन इसके जनक हम हैं। तकनीक और संस्कृति में कोई समृद्ध है तो वो भारत है।

सत्यपाल सिंह के मुताबिक, बंदर हमारे पूर्वज नहीं...!
केंद्र सरकार में मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री सत्यपाल सिंह तो त्रिपुरा के मुख्‍यमंत्री से भी कई कदम आगे बढ़ गए थे। सत्यपाल सिंह ने इसी साल जनवरी में इंसान के क्रमिक विकास पर आधरित चार्ल्स डार्विन के सिद्धांत को गलत बताते हुए कहा था कि डार्विन का सिद्धांत वैज्ञानिक रूप से गलत है। स्कूल और कॉलेज के पाठ्यक्रमों में इसे बदलने की जरूरत है। इंसान जब से पृथ्वी पर देखा गया है, हमेशा इंसान ही रहा है। हमारे किसी भी पूर्वज ने लिखित या मौखिक रूप में बंदर को इंसान में बदलने का जिक्र नहीं किया था।

Posted By: Tilak Raj