नई दिल्ली, जेएनएन। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के इस्तीफे की पेशकश के साथ पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को सुनाई गई खरी-खरी ने चुनावी हार से हार से हलकान पार्टी में खलबली और बढ़ गई है। कई दिग्गज नेताओं के पुत्र मोह में पार्टी हित की परवाह नहीं करने के रवैये का खुलासा कर राहुल गांधी ने जिम्मेदारी से बचने की इन नेताओं की रणनीति पर पानी फेर दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष के इस रुख ने हार की जवाबदेही से बचकर निकलने की वरिष्ठ नेताओं की पुरानी शैली उजागर हो गई है और इसकी वजह से इन नेताओं पर भी अपनी-अपनी नाकामी खुले तौर पर कबूल करने का दबाव बढ़ गया है।

कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने पर अडि़ग राहुल गांधी ने शनिवार को कार्यसमिति में अशोक गहलोत और कमलनाथ के साथ वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम के पुत्रमोह में पार्टी के हित की अनदेखी करने की बात कह पूरी बैठक को सन्न कर दिया। इस बेबाकी के जरिये राहुल ने वरिष्ठ पार्टी नेताओं को साफ संदेश दे दिया कि उनके इस्तीफे की पेशकश ठुकराने का प्रस्ताव पारित कर उनके नेतृत्व में भरोसा जताने की एवज में वे बड़े नेताओं के इस रवैये पर अब आंख नहीं दबाएंगे। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी पराजय की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की अपनी गंभीरता का संदेश देकर राहुल ने साफ तौर पर लंबे अर्से से पार्टी की सत्ता सियासत का संचालन करने वाले तमाम वरिष्ठ नेताओं को भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं के कठघरे में खड़ा कर दिया है।

कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में पार्टी दिग्गजों की परिवार केंद्रित राजनीति का पर्दाफाश किए जाने से पार्टी के अंदर काफी हलचल है। पार्टी के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने दिग्गजों को सुनाई गई खरी-खरी से सहमति जताते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान सच्चाई यही रही कांग्रेस के बड़े नेता अपने परिवार या समर्थक की सीट सुरक्षित कराने की कसरत में ही लगे रहे। इसकी वजह से पूरे चुनाव अभियान का भार अकेले राहुल गांधी के कंधों पर ही रहा।

मध्यप्रदेश और राजस्थान के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने राहुल की कार्यसमिति में की गई बेबाक टिप्पणी के बारे में कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि मुख्यमंत्री कमलनाथ भले चुनाव प्रचार के लिए सूबे में जाते रहे मगर उनकी पूरी रणनीति छिंदवाडा में बेटे को जिताने पर ही सिमटी रही। कांग्रेस की केंद्र की राजनीति में सक्रिय राजस्थान के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के चुनाव अभियान का एक चौथाई समय तो केवल बेटे वैभव गहलोत को जोधपुर से जिताने की जुगत में ही लगा रहा। मगर बेटे को सांसद बनाना तो दूर गहलोत पूरे सूबे में ही पार्टी का सफाया करवा बैठे।

पार्टी सूत्रों के अनुसार कार्यसमिति की बैठक में राहुल ने चुनावी शिकस्त में अपने नेताओं की भूमिका पर खरी-खरी बातें कहते हुए इस्तीफे की पेशकश की तो एक वरिष्ठ नेता ने ऐसा नहीं करने की बात कही। इस पर प्रियंका गांधी वाड्रा ने आक्रोश का इजहार करते हुए उनसे सवाल कर डाला कि आप तब कहां थे जब कांग्रेस अध्यक्ष पर प्रहार किया जा रहा था। प्रियंका ने राफेल और चौकीदार चोर है के मुद्दे पर भी कांग्रेस नेताओं के चुनाव के दौरान राहुल के साथ नहीं आने और उन्हें अकेला छोड़ देने को लेकर खरी-खरी सुनाई।

हालांकि प्रियंका ने इस्तीफा देने की राहुल की पेशकश पर उन्हें सोनिया गांधी के साथ मिलकर समझाने का प्रयास जरूर किया। राहुल का कहना था कि वे कांग्रेस की विचारधारा के लिए एक कार्यकर्ता की तरह पूरी निष्ठा से लड़ाई लड़ते रहेंगे। साथ ही गांधी परिवार से बाहर के किसी चेहरे को नया अध्यक्ष बनाने की बात कह राहुल ने पार्टी नेताओं को अपनी बहन प्रियंका को फिलहाल इसमें नहीं खींचने की सीमा रेखा भी तय कर दी। कार्यसमिति के प्रस्ताव के बाद भी कांग्रेस अध्यक्ष के अडि़ग रहने के रुख को देखते हुए कई नेताओं ने प्रियंका और सोनिया से फिर समझाने के लिए कहा तब इन दोनों ने कहा कि अगर वे नहीं मानते हैं तो फिर हमें राहुल के फैसले का सम्मान करना चाहिए।

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