नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। किसान आंदोलन के बीच तेजी चल रही राजनीति को लेकर पहले से तैयार भाजपा ने राहुल गांधी की प्रेस कांफ्रेंस से पहले ही हमला बोल दिया। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने राहुल के सामने किसान आंदोलन से लेकर कांग्रेस काल में चीन के अतिक्रमण जैसे कई सवाल दाग दिए। नड्डा के सवालों पर जब कोई जवाब नहीं मिला तो सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने सीधा आरोप लगाया कि राहुल भाग गए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार और किसान नेताओं की बातचीत को विफल करने की कोशिश में जुटी है।

भाजपा अध्यक्ष ने एक के बाद एक कई ट्वीट कर खासतौर पर उन विषयों पर राहुल को असहज किया जिसे वह पिछले कुछ महीनों से उठाते रहे हैं। नड्डा ने राहुल गांधी पर किसानों को भड़काने और गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें किसानों प्रति हमदर्दी तभी होती है, जब विपक्ष में होते हैं। कांग्रेस ने सत्ता में रहते हुए वर्षो तक स्वामीनाथन समिति की रिपोर्ट क्यों नहीं लागू की, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) क्यों नहीं बढ़ाया? नड्डा ने यह भी जानना चाहा कि यदि कांग्रेस को किसानों की इतनी ही चिंता है तो उसके इतने लंबे शासन काल में देश का किसान गरीब क्यों बना रहा।

एपीएमसी कानून से मंडियां बंद होने के राहुल गांधी के बयान को झूठ करार देते हुए नड्डा ने कहा कि खुद कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में एपीएमसी कानून रद करने का वादा किया था। यदि कांग्रेस एपीएमसी कानून को खत्म करती तो क्या मंडियां बंद नहीं होतीं?जेपी नड्डा ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए कहा कि जवाहर लाल नेहरू के कार्यकाल में अरुणाचल प्रदेश समेत देश की हजारों किलोमीटर जमीन चीन को तोहफे में दे दी गई थी। उन्होंने राहुल से सवाल किया कि क्या वह इसका खंडन कर पाएंगे।

चीन के आक्रामक रवैये का समुचित जवाब नहीं देने को लेकर मोदी सरकार के खिलाफ राहुल गांधी के आरोपों पर पलटवार करते हुए नड्डा ने जानना चाहा कि कांग्रेस और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के बीच हुए समझौते को राहुल गांधी कब रद कर रहे हैं और गांधी परिवार के नियंत्रण वाले ट्रस्ट को चीन से मिले चंदे को कब वापस करेंगे। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कब तक उनकी नीतियां चीनी चंदे और समझौते से संचालित होती रहेंगी? नड्डा ने राहुल से यह भी जानना चाहा कि रिकार्ड समय में टीका तैयार करने के लिए वैज्ञानिकों की प्रशंसा क्यों नहीं कर पाते हैं। इसी तरह उन्होंने संप्रग सरकार के दौरान जल्लीकट्टू पर प्रतिबंध लगाने और अब तमिलनाडु जाकर उसका आनंद लेने पर तीखा कटाक्ष किया।

राहुल ने पत्रकार वार्ता में नड्डा के सवालों का जवाब देने से साफ मना कर दिया तो पलटवार करते हुए जावडेकर ने कहा कि कांग्रेस 'खेती का खून' होने की बात कर रही है। लेकिन सच्चाई तो यह है कि खुद कांग्रेस के हाथ उन किसानों के खून से सने हैं जिन्हें उसके शासनकाल में आत्महत्या करने के लिए मजबूर होना पड़ा था। इसी तरह आजादी के समय लाखों लोगों की मौत और 1984 के दंगों में मारे गए तीन हजार सिखों के लिए सीधे तौर पर कांग्रेस जिम्मेदार है। उन्होंने इस क्रम में भागलपुर दंगे में मारे गए लोगों की भी याद दिलाई। उस वक्त वहां कांग्रेस का ही शासन था। जावडेकर ने कहा कि कांग्रेस काल में तो सिर्फ एक ही परिवार का राज रहा। सब कुछ उनके हितों की पूर्ति के लिए होता रहा। पहली बार देश के 130 करोड़ लोगों का राज आया है तो कांग्रेस और राहुल बेचैन हैं।

 

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