जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। राहुल गांधी ने भले ही ऐलान कर दिया है कि इस्तीफा देने के साथ ही वे कांग्रेस अध्यक्ष पद पर नहीं रहे। मगर पार्टी ने साफ कर दिया है कि जब तक कांग्रेस कार्यसमिति राहुल का इस्तीफा मंजूर नहीं कर लेती तब तक वे अध्यक्ष बने रहेंगे। हालांकि राहुल के इस्तीफे की घोषणा से हतप्रभ पार्टी ने संकेत दिए हैं कि उनके उत्तराधिकारी की तलाश में अब ज्यादा विलंब नहीं होगा। संकेतों के अनुसार कांग्रेस के नये नेतृत्व का फैसला करने के लिए कार्यसमिति की बैठक अगले सप्ताह बुलाए जाने की प्रबल संभावना है।

पार्टी के वरिष्ठ सूत्रों ने कहा कि बेशक राहुल ने सार्वजनिक तौर पर पद छोड़ने का ऐलान कर दिया है मगर कांग्रेस पार्टी के संविधान के अनुसार कार्यसमिति जब तक इस्तीफा मंजूर नहीं कर लेती तब तक राहुल गांधी ही अध्यक्ष हैं। पार्टी संविधान के हिसाब से राहुल का इस्तीफा कार्यसमिति पहले मंजूर करेगी और फिर उसी बैठक में नये अध्यक्ष का चयन करेगी।

सूत्रों ने कहा कि कार्यसमिति की बैठक के बिना सबसे वरिष्ठ महासचिव मोतीलाल वोरा को अंतरिम अध्यक्ष बनाए जाने की बातें अफवाह है। फिलहाल अंदरूनी हकीकत यही है कि अभी तक पार्टी का पूरा प्रयास राहुल गांधी को इस्तीफा वापस लेने के लिए राजी करने पर ही था। साथ ही ऐसा नहीं करने पर उत्तराधिकारी तय करने का जिम्मा भी पार्टी नेता राहुल पर ही डाल रहे थे और राहुल ने अपने इस्तीफे की चिठ्ठी में इसका जिक्र भी किया है। उनका कहना था कि चूंकि राहुल ने पार्टी के इन दोनों प्रयासों पर ब्रेक लगा दिया है तो नये अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की हलचल अब तेज होगी। कार्यसमिति ही नया अध्यक्ष पूर्णकालिक होगा या अंतरिम इसका फैसला करेगी।

कांग्रेस के नये अध्यक्ष के लिए मजबूत चेहरे की जरूरत का इशारा कर राहुल ने वरिष्ठ नेताओं को यह संदेश दिया है कि संगठन का संचालन पर्दे के पीछे से गांधी परिवार ही कर रहा है, ऐसे चेहरे को नेतृत्व देने के वे हिमायती नहीं हैं। वैसे राहुल के इस संकेत से इतर फिलहाल गांधी परिवार के करीबी माने जाने वाले पूर्व गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे को कांग्रेस अध्यक्ष पद के प्रबल दावेदारों में गिना जा रहा है।

साथ ही पिछली लोकसभा में पार्टी संसदीय दल के नेता रहे कर्नाटक के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे दूसरे प्रबल दावेदार हैं। शिंदे और खड़गे पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं और दोनों दलित समुदाय से आते हैं। इसके अलावा राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को भी संभावित नामों में गिना जा रहा है।

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह भी कांग्रेस अध्यक्ष के लिए मुफीद चेहरों में शामिल हैं मगर उनकी उम्र इसमें आड़े आ रही है। वैसे गांधी परिवार से बाहर के चेहरे को नया अध्यक्ष बनाए जाने की स्थिति में चार कार्यकारी अध्यक्ष बनाने के विकल्प पर चर्चा की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा जिन्हें देश के चारों हिस्सों के संगठन की जिम्मेदारी सौंप कांग्रेस को मजबूत करने का लक्ष्य दिया जा सके। बहरहाल राहुल के इस्तीफे पर असमंजस खत्म होने के बाद कांग्रेस कार्यसमिति की अगले सप्ताह संभावित बैठक ही पार्टी के भविष्य के नेतृत्व की रूपरेखा का फैसला करेगी।

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Posted By: Sanjeev Tiwari