नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। गृहमंत्रालय से संबंधित संसदीय समिति की बैठक में छात्र आंदोलन से निपटने के दौरान पुलिस बल के प्रयोग पर सवाल उठाए गए। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा की अध्यक्षता में हुई बैठक में दिल्ली पुलिस आयुक्त अमूल्य पटनायक के साथ-साथ गृहमंत्रालय के अधिकारियों से कई सवाल पूछे गए। इनमें सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई, छात्रों पर एक्शन, धारा 144 लगाने जैसे मामले शामिल हैं।

विपक्षी सांसदों ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को घेरा

वैसे संसदीय समिति में सीधे तौर पर जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय का नाम नहीं लिया गया। लेकिन सांसदों ने यह जानना चाहा कि आखिर छात्रों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई कहां तक उचित है। विपक्षी सांसदों ने छात्रों के खिलाफ हुए एक्शन पर सवाल खड़े किए और इसके साथ ही विरोध प्रदर्शन के दौरान कई स्थानों पर धारा 144 लगाने और इंटरनेट को बंद किये जाने पर भी सवाल खड़े किए गए। विपक्षी नेताओं ने सुझाव दिया कि छात्र आंदोलनों से निपटने के तरीके पर पुनर्विचार होना चाहिए और सीधे पुलिस कार्रवाई के बजाय पहले छात्र नेताओं से बात करना जरूरी है।

सोशल मीडिया के दुरूपयोग को लेकर जताई चिंता

इसके साथ ही बैठक में बीते दिनों तीस हजारी कोर्ट में वकीलों और पुलिस के बीच विवाद का मामला भी उठा। विपक्षी सांसदों ने वकीलों के खिलाफ पुलिस के धरने को लेकर अमूल्य पटनायक को घेरा। उनका कहना था कि जब पुलिस ही धरना देगी, तो उसके नेतृत्व पर सवाल उठना स्वाभाविक है। पिछले दिनों हुए हिंसक आंदोलनों में सोशल मीडिया के दुरूपयोग को लेकर भी बैठक में चिंता व्यक्त की गई। सांसदों ने सोशल मीडिया का दुरूपयोग रोकने के लिए सरकार की ओर से कड़े कदम उठाने को कहा गया। गृह मंत्रालय के मामलों से जुड़ी इस संसदीय कमेटी में इसके अध्यक्ष आनंद शर्मा के अलावा विभिन्न दलों के राज्यसभा-लोकसभा के कुल 31 सांसद शामिल हैं।

 

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