नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। नौ जनवरी को खत्म हुआ संसद का शीत सत्र 16वीं लोकसभा का तीसरा सबसे कम कामकाज वाला सत्र रहा। लोकसभा में विधायी कामकाज के लिए तय समय में से सिर्फ 46 फीसद कामकाज हुआ जबकि राज्यसभा के लिए यह आंकड़ा महज 26 फीसद ही रहा। अब तक आरक्षण रहित वर्ग को 10 फीसद आरक्षण देने का ऐतिहासिक बिल अगर इस सत्र में पारित हुआ तो सदन में हंगामा करने के चलते लोकसभाध्यक्ष द्वारा 49 सांसदों को निलंबित करने रिकार्ड भी बना। सत्र के दौरान तय 20 बैठकों में से केवल 17 ही हो सकीं। सत्र के अंत में राज्यसभा एक अतिरिक्त दिन चली।

बिलों पर बहस का समय बढ़ा
सत्र की शुरुआत में 23 बिल विचार और पारित करने को सूचीबद्ध थे जबकि दो को वापस लिया जाना था। इसके अतिरिक्त 20 बिलों को पेश करना, विचार करना और पारित कराना था। समग्र रूप से 16 बिल पेश किए गए और चार बिल दोनों सदनों से पारित हुए।

वर्तमान लोकसभा में 62 फीसद बिलों पर दो घंटे से ज्यादा की बहस की गई। जबकि 14वीं और 15वीं लोकसभा में क्रमश: इतने समय हुई बहस वाले बिलों का फीसद 30 और 44 है। राज्यसभा के 25-35 फीसद बिलों पर दो घंटे से अधिक बहस हुई।

उपलब्ध घंटों में से हुई वास्तविक बैठकें

  • 17 दिनों की बैठक में से 14 दिन हंगामे के चलते समय से पहले लोकसभा स्थगित हुई। राज्यसभा के साथ ऐसा 18 में से 16 दिन हुआ।
  • अब तक इस संसद में लोकसभा ने अपने तय समय का छठा हिस्सा हंगामे में बर्बाद किया है। राज्यसभा ने एक तिहाई समय नष्ट किया है।
  • पिछले तीन लोकसभा के दौरान औसत कामकाजी समय में गिरावट के बाद सुधार दिखा है, लेकिन राज्यसभा में लगातार गिरावट जारी है।

कानून बनाने में लगा समय

  • 14वीं और 15वीं लोकसभा की तुलना में 16 में विधायी कामकाज में ज्यादा समय लगा। जबकि इसी समयावधि के दौरान राज्यसभा में यह समय स्थिर रहा।
  • इस सत्र में लोकसभा ने अपने कामकाज का 52 फीसद, राज्यसभा ने 44 फीसद समय विधायी कार्यों में लगाया।

8 फीसद सवालों के मौखिक उत्तर

  • 16वीं लोकसभा का यह सबसे कम कामकाज वाला प्रश्नकाल रहा। हंगामे के चलते पूरे सत्र के दौरान पूरा प्रश्नकाल केवल दो ही दिन चल सका।
  • लोकसभा में 30 सवालों के मौखिक जवाब दिए गए जबकि 400 सवाल सूचीबद्ध थे।
  • राज्यसभा में सत्र के अंत में दो दिन सभी 15 सवालों का मौखिक जवाब दिया गया।  

Posted By: Sanjay Pokhriyal

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