नई दिल्ली, प्रेट्र। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सात फरवरी को असम के बोडो बहुल कोकराझार कस्बे में एक रैली को संबोधित करेंगे। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) विरोधी कई प्रदर्शनों के बाद प्रधानमंत्री की यह पहली पूर्वोत्तर यात्रा होगी। एक हफ्ते पहले ही केंद्र सरकार ने कई बोडो उग्रवादी समूहों और एक छात्र संगठन के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

इसके बाद प्रमुख उग्रवादी समूह नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड के 1,500 से ज्यादा उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण कर दिया था। ज्ञात हो कि सीएए विरोधी प्रदर्शनों के चलते ही प्रधानमंत्री मोदी और जापानी प्रधानमंत्री एबी शिंजो के बीच दिसंबर में गुवाहाटी में होने वाली शीर्ष बैठक रद कर दी गई थी। इसके अलावा हाल में संपन्न 'खेलो इंडिया' गेम्स के उद्घाटन के लिए भी प्रधानमंत्री मोदी को आमंत्रित किया गया था, लेकिन वह उसमें शामिल नहीं हुए थे।

बता दें कि इससे पहले नागरिकता संशोधन कानून को लेकर असम में चले उग्र विरोध प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 जनवरी को असम जाने वाले थे, लेकिन अंतिम समय में उनका दौरा रद हो गया था। वे वहां परखेलो इंडिया गेम्स के उद्घाटन समारोह में शिरकत करने वाले थे।

प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के रद होने के पीछे समयाभाव का कारण बताया गया था। हालांकि, यह भी माना जा रहा है कि ऐक्ट के खिलाफ प्रदर्शन की अगुआई कर रहे ऑल स्टूडेंट्स यूनियन (एएएसयू) की चेतावनी के मद्देनजर पीएम का असम दौरा रद कर दिया गया था।

बता दें कि प्रधानमंत्री का गुवाहाटी जाने की खबर ऐसे समय में आई थी, जब नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन चल रहा था। नए नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन की अगुआई कर रहे ऑल स्टूडेंट्स यूनियन (एएएसयू) ने तब मोदी के यहां आगमन की स्थिति में बड़े विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी थी। हालांकि, उस समय असम भाजपा के प्रवक्ता दीवान ध्रुब ने इस बारे में बताया कि पीएम का दौरा रद हो गया है क्योंकि उनके पास अभी समय नहीं है।

Posted By: Sanjeev Tiwari

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